शुक्रवार, जुलाई 30, 2010

किस करम का कौन सा नरक ..?

सभी नरक यम के राज्य में स्थिति हैं । इन नरकों की स्थिति प्रथ्वीलोक से नीचे मानी गयी है । गौ हत्या । भ्रूण हत्या । आग लगाने वाला रोध नामक नरक में जाता है । ब्रह्मघाती । शराबी । सोने की चोरी करने वाला । सूकर नरक में जाता है । क्षत्रिय । वैश्य की हत्या करने वाला ताल नरक में जाता है । ब्रह्महत्या । गुरुपत्नी या बहन के साथ सहवास करने वाला असत्य भाषण करने वाला राजपुरुष तप्तकुम्भ में जाता है । निषिद्ध पदार्थ बेचने वाला । शराब बेचने वाला । तथा स्वामिभक्त सेवक को त्यागने वाला तप्तलौह में जाता है । कन्या या पुत्रवधू के साथ सहवास करने वाला । वेद विक्रेता । वेद निंदक । महाज्वाल नरक में जाता है । गुरु का अपमान करने वाला । व्यंग्य करने वाला । अगम्य स्त्री के साथ सहवास करने
वाला शबल नामक नरक में जाता है । मर्यादा त्यागने वाला वीर विमोहन नरक में । दूसरे का अनिष्ट करने वाला कृमिभक्ष में । देवता । ब्राह्मण से द्वेश रखने वाला लालाभक्ष में । परायी धरोहर हडपने वाला । बाग बगीचे में आग लगाने वाला । विषज्जन नरक में जाता है । असत पात्र से दान लेने वाला । असत प्रतिग्रह लेने वाला । अयाज्य याचक । और नक्षत्र से जीविका चलाने वाला अधःशिर नरक में जाता है । मदिरा । मांस का विक्रेता पूयवह नरक में । मुर्गा । बिल्ली । सूअर । पक्षी । हिरन । भेड को बांधने वाला भी पूयवह में जाता है । घर जलाने वाला । विष देने वाला । कुण्डाशी । शराब विक्रेता । शराबी । मास खाने वाला । पशु मारने वाला । रुधिरान्ध नरक में जाता है । शहद निकालने वाला वैतरणी । क्रोधी मूत्रसंग्यक नरक में । अपवित्र और क्रोधी असिपत्रवन में । हिरन का शिकार करने वाला अग्निज्वाल ।
यग्यकर्म में दीक्षित लेकिन वृत का पालन न करने वाला संदंश । स्वप्न में भी स्खलित होने वाला संयासी
या ब्रह्मचारी अभोजन नरक में । सबसे ऊपर भयंकर गर्मी वाला रौरव । उसके नीचे महारौरव । उसके नीचे शीतल । उसके नीचे तामस । इसके बाद अन्य नरक क्रम से नीचे स्थित हैं । इन नरकों में एक दिन सौ वर्ष के समान होता है । इन नरकों में भोग भोगने के बाद पापी तिर्यक योनि में जाता है । इसके बाद कृमि । कीट । पतंगा ।
स्थावर । एक खुर वाले गधे की योनि प्राप्त होती है । इसके बाद जंगली हाथी आदि की योनि में जाकर गौ की योनि में पहुचता है । गधा । घोडा । खच्चर । हिरन । शरभ । चमरी । ये छह योनियां एक खुर वाली हैं । इसके अतिरिक्त बहुत सी अन्य योनिंयो को भोगकर प्राणी मनुष्य योनि में आता है । और कुबडा । कुत्सित । बौना । चान्डाल आदि योनि में जाता है । अवशिष्ट पाप पुण्य से समन्वित जीव बार बार गर्भ में जाते हैं और मृत्यु को प्राप्त होते है । सब पापों के समाप्त हो जाने के बाद शूद्र । वैश्य । क्षत्रिय आदि होता हुआ क्रम से आरोहण को प्राप्त करता है । इसी में सत्कर्मी होने से ब्राह्मण । देव और इन्द्र के पद पर भी जाता है । मृत्यु लोक में जन्म लेने वाले का मरना निश्चित है । पापियों का जीव अधोमार्ग से निकलता है । यमद्वार पहुचने के लिये जो मार्ग बताये गये हैं । वे अत्यन्त दुर्गन्धदायक मवाद । रक्त से भरा हुआ है । इस मार्ग में स्थित वैतरणी को पार करने के लिये वैतरणी गौ का दान
करना चाहिये । जो गौ पूरी तरह काली हो । स्तन भी काले हों । वह वैतरणी गौ होती है । यमलोक का मार्ग भीषण ताप से युक्त है । अतः छत्रदान करने से मार्ग में छाया प्राप्त होती है । यमराज के दूत महाक्रोधी और भयंकर है । उदारता पूर्वक दान करने वाले को कष्ट देने का विधान नहीं है ।
मनुष्य का यह शरीर केले के वृक्ष के समान सारहीन एवं जल के बुदबुदे के समान क्षणभंगुर है । इसमें जो सार देखता है । मानता है । वह महामूर्ख है ।पंचतत्वों से बना यह शरीर पुनः अपने किये हुये कर्मों के अनुसार उन्हीं पंचतत्वों में जाकर विलीन हो जाता है । अतः उसके लिये रोना क्या ? जब प्रथ्वी । सागर । देवलोक तक नष्ट होते हैं । तो यह मर्त्यलोक तो जल के फ़ेन के समान है ।
मनुष्य के शरीर में साढे तीन करोढ रोंये होते है । कहा जाता है । जो स्त्री ( स्वेच्छा से ) सती होती है । वह इतने ही समय तक पति का उद्धार करती हुयी सुखपूर्वक स्वर्ग में वास करती है और यह अवधि चौदह इन्द्रों के बराबर है । यानी स्वर्ग में चौदह इन्द्र बदल जाते हैं । गर्भवती स्त्री और छोटे बच्चों वाली स्त्री के लिये सती होने का विधान नहीं हैं ।

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