बुधवार, अगस्त 18, 2010

मन्त्र काम क्यों नहीं करता..? 1


कल 16 अगस्त 2010 को मुझे दो लोगों से बात करने का अनोखा अनुभव हुआ । इसमें पहली बात सेलफ़ोन द्वारा एक बहुत चालाक और रहस्यमय लडके से हुयी । जिसने सेलफ़ोन पर ही इंटरनेट के द्वारा मेरे लेखों को पढा होगा । लडका बातचीत और स्वर से किशोर और बेहद चालाक मालूम होता था । मेरे बहुत पूछने पर भी उसने अपने बारे में नहीं बताया । खैर ये लडका चुपचाप किसी प्रेत पूजा में लगा हुआ था । और अपने इष्ट को प्रेतराज कहता था । उसका कहना था कि उसे दर्शन क्यों नहीं रहे ? वह जल्दी से प्रेत को सिद्ध कर अपने कार्य पूरा करना चाहता था ? मैंने इसे बहुत समझाने की कोशिश की । कि तुम गलत मार्ग पर हो । और साधनाओं द्वारा ही कुछ हासिल करना चाहते हो । तो सात्विक और प्रभु भक्ति की साधना करो । जिससे हमेशा कल्याण ही होता है । और जिसमें फ़ायदा नहीं । तो कोई नुकसान तो हरगिज नहीं होता । और सबसे बडी बात ये है कि जब तक इंसान किसी साधना हेतु समझ के स्तर पर पूरी तरह से परिपक्व न हो जाय । उसे साधना नहीं करनी चाहिये । हां साधारण भक्ति एक साल का बालक भी करे तो वह अच्छा ही परिणाम देगी । मैंने उसे बहुत समझाने की कोशिश की । पर वो नहीं माना । मैं जानता था । वो इतना आग्रह क्यों कर रहा है । वो एक ऐसे क्षेत्र में रहता था । जहां ओझा तान्त्रिक जैसे लोगों का गढ था । उसकी फ़ोन कनेक्टिविटी और बोलने का अन्दाज एक रहस्यमय वातावरण का अहसास दे रहे थे । पर वो मेरे पीछे इस लिये पडा हुआ था । कि मेरी प्रेत कहानियों में जिस तरह का विवरण है । वो उसे बेहद आकर्षित कर रहा था । प्रेतनी का मायाजाल 1 से प्रेतनी का मायाजाल 8 तक । लेकिन अभी वो ये नही जानता था कि इस स्तर की साधना करने में इंसान को क्या क्या त्याग करना पडता है ? और क्या क्या पापड बेलने पडते हैं ? खैर मैंने कहा । तामसिक साधनाओं में मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकता । हां यदि तुम किसी प्रेत पीडा या अनोखे चक्रव्यूह में फ़ंसे हुये हो । तो तुम्हारी कोई मदद की जा सकती है । और तब जैसी कि अपेक्षा थी । उसने फ़ोन काट दिया ।
16 अगस्त 2010 का दिन ही शायद मेरे लिये अजीव था । शाम के समय मीनाक्षी निगम ( बदला हुआ नाम ) से मेरी मुलाकात हुयी । और मुझे मीनाक्षी को देखकर बेहद आश्चर्य हुआ । हालांकि तन्त्र मन्त्र के क्षेत्र में महिला का होना कोई आश्चर्य की बात नहीं थी । हजारों उन्मुक्त महिलायें इस क्षेत्र में मेरे अनुभव में आयी हैं । लेकिन वे अधिकांश घर से अलग हो चुकी होती हैं । और योगिनी या बाई जैसा जीवन जी रही होती हैं । पर मीनाक्षी एक शिक्षित परिवार की और स्वयं भी शिक्षित महिला थी । मुझे आश्चर्य इस बात का था कि उसकी रुचि मारण । मोहन । वशीकरण । हंडिया । शवसाधना । मुठकरनी । जैसी घोर तामसिक और दूसरे को कष्ट और नुकसान पहुंचाने वाली साधनाओं में बडे तीव्र स्तर पर थी । मैंने उसके बारे में और जानने के लिये प्रत्यक्ष एकदम मना नहीं किया कि मैं आपकी कोई सहायता नहीं कर सकता । मीनाक्षी के कामुक हावभाव देखकर मुझे पूर्वोत्तर क्षेत्र के उन आठ नौ जोगियों की याद आ गयी । जो शहर के बाहर एक शमशान के पास रहते थे । और भूत आदि का इलाज । औरत के बच्चा न होने जैसी कुछ बातों का इलाज करते थे । रात को दस ग्यारह बजे तक भटकी हुयी । भृमित हुयी औरतें उनके पास पहुंचती थी । इन औरतों को माध्यम होकर ले जाने वाली वे औरतें होती थी । जो कामवासना के मामले में कुन्ठित होकर इनके जाल में फ़ंस गयी होती थी । जहां वे जोगी उनको परसाद के नाम पर पेडे आदि में नशीला दृव्य खिलाकर एक तरह से ग्रुप सेक्स करते थे । और फ़िर भारतीय समाज के लिये ग्रुप सेक्स प्रायः दुर्लभ होने के कारण उनको इस नये अनुभव का चसका पड जाता था । और इस तरह उन ढोंगी साधुओं के पास जाने वालों की एक चेन सी आटोमेटिक ही बन जाती थी । इसके बाद ये जोगी कुछ महिलाओं को गांजा चरस स्मैक जैसे नशीले पदार्थों की लत लगा देते थे । और फ़िर नशे और सेक्स का एक नया खेल शुरू हो जाता । मीनाक्षी को देखकर मुझे ये बात इसलिये याद आयी कि दरअसल मीनाक्षी वही सेक्स का पत्ता इशारों में फ़ेंक रही थी । यानी मैं उसका मार्गदर्शन करूं । और वह मुझे इसकी मनचाही कीमत दे ।
मैंने कहा । तुम्हारी परेशानी क्या है ? उसने कहा । मैं कई बार लाख की संख्या में मन्त्र जाप कर चुकी हूं । मैंने
यहां पर ....ये क्रिया की ? मैंने शमशान में ये .....साधना की । मैंने उस पर ये तन्त्र....चलाया । जो कुछ हद तक चला भी...आदि ? तो मेरी ये मेहनत सफ़ल क्यों नहीं होती ? मेरे मन्त्र सिद्ध क्यों नहीं होते ? मेरे मन्त्र एक्टिव क्यों नहीं होते ? मैं मीनाक्षी की और देखकर रहस्यमय अन्दाज में मुस्कराया । क्रमशः

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