शुक्रवार, अप्रैल 22, 2011

अब तू औरत नहीं चुङैल है । 2

- टीकम सिंह जी । प्रसून उसकी बात पूरी होने पर बोला - आपने गजनी फ़िल्म देखी है । जिस तरह आमिर खान को थोङी थोङी देर में भूल जाने की बीमारी थी । वैसी ही बीमारी मुझे भी है । इसलिये आपके घर चलने से पहले  उसका एक नक्शा बना लेते हैं । ताकि वापसी में मैं अपने घर का रास्ता ही न भूल जाऊँ ।
कहते हुये प्रसून ने एक सामान्य सी दिखने वाली प्लेन कापर मैटल शीट टेबल पर बिछा दी । जो वास्तव में दूरस्थ प्रेतवाधा उपचार हेतु एक शक्तिशाली यंत्र का काम करती थी ।
दरअसल वह टीकम सिंह को एक जादुई खेल दिखाने का इच्छुक था । जिसके दो खास कारण थे । एक तो आज वह खुश मूड में था । दूसरे टीकम सिंह गरीब आदमी था । और सबसे  बङी बात ये थी कि जिस तरह का यह मामला था । उसमें कहीं जाने की आवश्यकता ही नहीं थी । ये किसी तरह के आवेशित प्रेत नहीं थे । जिनको वहाँ से निकालना पङता । प्रेतवायु के उपचार के बाद भी सभी को वहीं रहना था । वास्तव में दीर्घकालिक प्रेत पङोसियों में किसी बात पर जरा सा विरोधाभास हो सकता था । जरा सा मनमुटाव हो सकता था । या कोई अन्य अलग सामान्य बात हो सकती थी ।
आगे की बात शुरू करने से पहले उसने आवाज दी - अल्ला बेबी ।
कुछ ही क्षणों में 12 साल की एक लङकी बे आवाज दरबाजा खोलकर अन्दर आकर निशब्द एक चेयर पर बैठ गयी ।
- माम को भी । प्रसून मधुर मुस्कान के साथ बोला । लङकी फ़िर से उठी । और अन्दर जाकर जब दुबारा वापस आयी । तो उसके साथ 28 वर्ष की एक महिला भी थी । दोनों निशब्द अलग अलग चेयर पर बैठ गये । टीकम सिंह बेहद हैरत से ये सब देख रहा था । कंजी आँखो वाली रहस्यमय गुङिया सी अल्ला बेबी पर उसकी निगाह बारबार जाती थी । पर अल्ला एकदम भावशून्य होकर बैठी थी ।
- जेनी । प्रसून एक सिगरेट सुलगाकर बोला - तुमको चुङैल देखना मांगता । एक गाना गाने वाली चुङैल ।
जेनी हल्के से मुस्कराकर रह गयी । उसने ईसाईयों के अन्दाज में सीने पर बाय़ें दांये मस्तक और फ़िर हार्ट के पास उंगली रखकर क्रास बनाया । और शान्त बैठ गयी ।
जेनी ईसाई थी । और अल्ला उसकी डाटर । जेनी प्रसून के यहाँ सर्वेंट के रूप में कार्य करती थी । और घर की पूरी देखभाल का जिम्मा उसी पर था ।  इस बात को कोई नहीं जानता था कि 800 वर्ग गज में बनी यह खूबसूरत कोठी प्रसून की खुद की थी । और व्यक्तिगत रूप से थी । इस बेहद रहस्यमय इंसान के घरवाले तक यह बात नहीं जानते थे । और इसकी वजह थी । प्रसून द्वारा इसके बेहद पुख्ता गोपनीय इंतजाम । और ज्यादातर उसका यहाँ वहाँ रहना ।
कुछ खास परेशानी वाले लोगों को यदाकदा फ़ोन नम्बर मिल जाने पर उसने अपने दो चार ठिकानों पर बुला लिया था । जिससे कुछ लोग इन स्थानों के बारे में जान गये थे । और भटकते हुये आ ही जाते थे । ये सभी स्थान उसके पेरेंट हाउस से बेहद बेहद दूरी पर थे । इसलिये प्रसून के मां बाप इस रहस्य को अब तक नहीं जान पाये थे । उसके माता पिता के बारे में नीलेश उसकी गर्लफ़्रेंड मानसी और उसके गुरु तथा कालेज के टाइम के कुछ साथी ही जानते थे । नीलेश मानसी और गुरु के अलावा उसके खास रहस्यों को कोई भी नहीं जानता था । मानसी भी उसकी पर्सनल बातों को कम ही जानती थी ।
प्रसून के लिये उसका कहना था । वेरी बोरिंग एन्ड वेरी इंट्रेस्टिंग मेन..साला ..ऐसा भी आदमी किस काम का..जिसको बुलबुलों में रस न आता हो ?
अल्ला टेबल पर रखा प्रसून का सेलफ़ोन उठाकर गेम खेलने लगी । प्रसून ने एक गहरा कश लगाया । और सिगरेट एश ट्रे में डाल दी । इसके बाद उसने सुनहले रंग का मोटा मार्कर उठाया । और मैटल शीट पर तीन आयत बनाता हुआ बोला - टीकम सिंह जी ! ये बीच वाला आपका घर । ये इधर गाने वाली चुङैल का खन्डहर मकान । और ये इधर कब्रिस्तान ..ये आपके घर के दरबाजे से मेन रोड का रास्ता । और ये मेन रोड । ये मेन रोड से इस शहर..? का रोड । और इस रोड से ये मेरे घर की सङक । और..फ़िर से वह एक आयत बनाता हुआ बोला ।..ये रहा मेरा घर । जिसमें हम लोग इस समय बैठे हैं ।
कहते हुये उसने खूबसूरत बंगले की शेप वाला एक नाइट लेम्प अपने घर के आयत चिहन पर रख दिया । और अल्ला को गेम बन्द करने को कहकर उसने दूसरा मोबाइल निकाला । और उसे अभिमंत्रित सा करते हुये नाइट लेम्प के अन्दर रख दिया । और बोला । बेबी । अभी चुङैल का फ़ोन रिसीव करने का है ।
अल्ला हौले से मुस्कराई । मानों प्रसून ने सामान्य सी बात कही हो । मगर टीकम सिंह एकदम ही सतर्क होकर बैठ गया ।
..कुछ ही क्षणों में पायल की मधुर रुनझुन रुनझुन सुनाई देने लगी । इस बेहद परिचित ध्वनि को सुनकर टीकम सिंह भौंचक्का सा सतर्क होकर बैठ गया । अल्ला की कंजी आँखे स्थिर हो गयी । और वे चमकती हुयी सी बंगले के माडल पर स्थिर हो गयी ।
मैं आ गयी । अल्ला बदली हुयी आवाज में बेहद महीन झंकृत स्वर में बोली । आग्या दें । किसलिये याद किया ?
योर वेलकम कामिनी जी । प्रसून शालीनता से बोला । आपको आने में कोई परेशानी तो नहीं हुयी ? ये आपके पङोसी टीकम सिंह जी यहाँ बैठे हुये हैं । इन्होंने बताया कि आप गाना बहुत अच्छा गाती हैं । मैं आपकी एक म्यूजिकल नाइट आर्गनाइज कराना चाहता हूँ ।
नहीं । अल्ला फ़िर से बोली । मुझे कोई परेशानी नहीं हुयी । योगीराज आप हँसी मजाक अच्छा कर लेते हैं ।
ओह नो..आय’म सीरियस । प्रसून बोला । दरअसल कामिनी जी..जेनी को किसी चुङैल..इस शब्द के प्रयोग के लिये सारी..प्लीज डोन्ट माइंड..तो कामिनी जी इसे आपके जैसे लोगों के गाने सुनने की ख्वाहिश थी । और ये बात मैं सीरियसली कह रहा हूँ ।
जी..जो आग्या । कहने के बाद कामिनी @ अल्ला सीरियस हो गयी ।
और पायल की पुनः रुनझुन के साथ एक मधुर संगीतमय ध्वनि उस रहस्यमय कमरे में मन्द मन्द गूंजने लगी । जेनी तो मानों मदहोश सी होने लगी । टीकम सिंह भौंचक्का सा इस नजारे को देख रहा था । वास्तव में वह तो इस वक्त यह भी भूल गया था कि वह यहाँ किसलिये आया है ? और उसकी अकेली पत्नी किस हाल में है ?
कृमशः ..।

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