सोमवार, अगस्त 22, 2011

अंगिया वेताल 2

- हा..। अचानक अपने बेडरूम में सोती हुयी रूपा एक झटके से उठकर बैठ गयी । उसका पूरा शरीर पसीने से नहाया हुआ था । उसने दीवाल घङी में समय देखा । दोपहर के दो बजने वाले थे । और वह ग्यारह बजे से गहरी नींद में सोई हुयी थी
कल रात वह इतना थक गयी थी । मानों हजारों मील की लम्बी यात्रा करके आयी हो । अभी भी उसका बदन आलस और पीङा से टूट रहा था । स्पर्श ने उसे प्रथम मुलाकात में ही असीम तृप्ति का अहसास कराया था । मचान के नीचे उसके साथ खेलने के बाद वह उसे नदी के घुमावदार मोङ पर गहरे पानी में ले गया था । वह निर्वस्त्र ही मूसलाधार बारिश में चलती हुयी वहाँ तक गयी थी । अपने कुर्ता शलवार उसने बैग में डाल लिये थे ।
वह नदी के गहरे पानी में उतर गयी । और मुक्त भाव से तैरने लगी । घर जाने की बात वह मानों बिलकुल भूल ही चुकी थी । स्पर्श उसके साथ ही था । और उसके मादक अंगों से खिलवाङ कर रहा था । पर अब उसे कोई संकोच नहीं हो रहा था । और वह किसी प्रेमिका की तरह उसका सहयोग कर रही थी । तब स्पर्श ने नदी के गहरे पानी में उससे खेलना शुरू कर दिया । यह उसके जीवन का एक अनोखा अनुभव था । काम सम्बन्धों के बारे में उसने अब तक सिर्फ़ सुना था । पर आज वह उसके अनुभव में आया था ।
रात दस बजे वह भीगती हुयी जब घर पहुँची थी । तब तक पानी बन्द हो चुका था । उसने घर पर झूठ बोल दिया । बुलबुल के घर देर हो गयी थी । सो उसका भाई मोङ तक छोङ गया था । फ़िर वह अपने कमरे में चली गयी ।
अभी अभी हुये काम खेल के अनुभव अभी भी उसके दिमाग में छाये हुये थे । वैसी ही हालत में वह आँखें बन्द कर लेट गयी । और सोने की कोशिश करने लगी ।
दूसरे दिन वह स्कूल नहीं गयी । और खाना खाकर फ़िर से सो गयी । गहरी नींद में उसे स्पर्श का अहसास फ़िर से हुआ । और वह अचानक " हा " कहती हुयी उठ गयी । पर ये उसका सिर्फ़ ख्याल ही था । स्पर्श वहाँ नहीं था ।
ऐसे ही ख्यालों में उसने बिस्तर छोङ दिया । और उठकर अपने लिये गर्म चाय बना लायी ।
कौन था ? ये उसका अनजाना प्रेमी । जिसको वह ठीक से देख भी नहीं पायी थी । बल्कि देखने का मौका ही नहीं आया था । वह तो उसके जादुई सम्मोहन में मदहोश ही हुयी जा रही थी । आज तक कई लङकों ने उसके पास आने की कोशिश की थी । पर अपने मजबूत संस्कारों के वश रूपा ऐसे सम्बन्धों को गलत मानती थी । वह अपना कौमार्य अपने पति के लिये सुरक्षित रखना चाहती थी । और पढाई में ही पूरा ध्यान लगाती थी । हालांकि उसकी सहेली बुलबुल चुलबुली थी । और जब तब किसी लङके सा बिहेव करते हुये वह उसके चिकोटी भर लेती थी । बुलबुल का ब्वाय फ़्रेंड भी था । पर रूपा ने मानों इस मामले में कसम खा रखी हो । और तभी वह विचलित भी नहीं होती थी ।

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