सोमवार, अगस्त 22, 2011

अंगिया वेताल 5

चोखा भगत पंजामाली के शमसान में पहुँचा । आज वह सिद्धि हेतु आया था । चोखा कई दिनों से इसके लिये चक्कर काट रहा था । तब रात दस बजे के करीब उसे दाह के लिये जाती लाश मिली थी । वह एक हंडिया और चावल साथ ले आया था । यह सिद्धि उसे लपटा बाबा ने बतायी थी । चोखा खुद क्योंकि अनपढ टायप इंसान था । और शौकिया ही तांत्रिक बना था । इसलिये उसने इधर इधर बाबाओं के पास बैठकर कुछ छोटे मोटे मन्त्र तन्त्र जन्त्र आदि सीख लिये थे । और इन्ही से काम करता हुआ वह अंधविश्वासी टायप मूढ औरतों में खासा लोकप्रिय था । मन्त्र तन्त्र से आकर्षित औरतें अक्सर उससे प्रभावित हो जाती थी । तब वह साधारण बातों में नमक मिर्च लगाकर उसमें भय पैदा करते हुये उनका मनमाना इस्तेमाल करता था ।
इसके अलावा एक कारण और भी था । हराम की खाने के हुनर में उस्ताद चोखा शरीर से बलिष्ठ था । अतः जब वह औरत को अनोखी तृप्ति का अहसास कराता था । तब वे वैसे ही उसकी गुलाम हो जाती थी । और अपनी ऐसी ही खूबियों के चलते चोखा मानता था कि उस पर भगवान की खासी कृपा है । और इसलिये उसकी पाँचों उंगलियाँ घी में और सर कङाही में है । पर जैसे कहा जाता है ना - अन्त बुरे का बुरा ।
उसके भी बुरे दिन शुरू हो चुके थे ।
चोखा की अपेक्षा लपटा बाबा जिगरवाला और बृह्मचारी था । लपटा वास्तव में संयोगवश इस लाइन में आ गया था । दरअसल लपटा की एक पुरानी पैत्रक जमीन नदी के किनारे पर थी । जिसको बहुत लम्बे समय से लावारिस पङी होने के कारण लोगों ने कब्रिस्तान बना लिया था ।
जब लपटा को अपनी जमीन की हकीकत का पता चला । तब उसने इसका विरोध करते हुये वहीं कब्रिस्तान में अपनी झोंपङी बना ली । और शवों को दफ़नाने से मना करने लगा । तब झगङे की नौबत आ गयी । और लोग जबरदस्ती शब को दफ़ना जाते थे । इसका उपाय लपटा ये करता था कि दफ़नाये गये शवों को रात में खोदकर नदी में बहा देता था । अतः अपनी इसी जिद के कारण और दिन रात शवों के सम्पर्क में रहने के कारण उसके चेहरे पर भयानकता और स्वभाव में बेहद निडरता आ गयी थी । फ़िर कालांतर में वह कुछ शव साधना वाले साधकों के सम्पर्क में आया । और इस तरह लपटा बाबा बन गया । बस उसकी खासियत ये थी कि वह लंगोट का पक्का था । और औरतों को कतई लिफ़्ट नहीं देता था । चोखा अक्सर लपटा के पास आता जाता था । और कुछ प्रयोग उसने लपटा से सीखे थे ।
रात के लगभग ग्यारह बज चुके थे ।  और शव को जलाने आये लोग वहाँ से जा चुके थे । चिता की आग अभी भी धधक रही थी । उनके जाते ही पेङों के पीछे छिपा चोखा निकल आया । और सावधानी से इधर उधर देखता हुआ जलते मुर्दे के पास आकर बैठ गया ।
उसने सिर्फ़ एक लंगोट पहना हुआ था । और सांवली बलिष्ठ कसरती देह से जिन्दा भूत ही लग रहा था । चोखा पहले भी शव के पास रात गुजारने के अनुभवों से गुजर चुका था । अतः उसके मन में नाम मात्र का भी भय न था । हाँ दूसरी बातों को लेकर भय था । क्या थी वे बातें ?
तब स्वतः ही उसके दिमाग में लपटा बाबा के बोल गूँजे - मगर सावधान चोखे ! सिद्धि के दौरान कोई रूपसी नग्न अर्धनग्न अवस्था में आकर तुझे काम निमन्त्रण दे । उसको स्वीकार नहीं करना । कोई डाकिनी शाकिनी डायन चुङैल तुझे भयभीत करे । करने देना । तू शान्त होकर अपना काम करना । अगर तू किसी भी तरह बहका । तो तेरी मौत निश्चित है । हाँ मौत । वो भी अकाल मौत ।

चोखा के भय से रोंगटे खङे हो गये । शमसान और तामसी शक्तियों की इस तरह की निकृष्ट साधना जिसमें डाकिनी शाकिनी प्रकट होने वाली थी । से रूबरू होने का उसका पहला ही चांस था । पर यह वह भी नहीं जानता था कि यह पहला चांस ही उसका आखिरी चांस होने वाला था ।
चोखा ने हंडिया मुर्दे के पास ही रख दी । और उसके पानी में चावल और कुछ अन्य चीजे डाल दी । फ़िर उसने अपने सामान की पोटली से तेल निकाला । और सारे बदन पर मलने लगा । पूरे बदन को तेल से तर बतर करने के बाद उसने चिता की गर्म गर्म राख को बदन पर मलना शुरू किया । और कुछ ही देर में भयानक काले जिन्न के समान नजर आने लगा । उसकी लाल लाल आँखे चिता के मद्धिम प्रकाश में खूंखार चीते की भांति चमकने लगी ।
- खुश हो कालका ! कहते हुये उसने चावल की हंडिया चिता पर पकने के लिये रख दी । और फ़िर गांजे से भरी चिलम को चिता की आग से जलाकर पीने लगा । निकृष्ट डरावनी साधनाओं में नशा भय को बहुत कम कर देता है । ये उसका माना हुआ अनुभव था । अतः उसने आज भी वही काम किया था ।
नशीली चिलम का सुट्टा जैसे ही उसके दिमाग में चङता । वह और भयंकर सा हो उठता । पूरी चिलम पीते पीते उसकी आँखे इस तरह लाल हो गयीं । मानों उनसे खून छलक रहा हो ।
फ़िर उसने चिता से काफ़ी गर्म राख उठायी । और जमीन पर एक बिछावन के रूप में बिछा दी । फ़िर उस पर बैठकर वह मन्त्र पढने में तल्लीन हो गया । क्लीं क्लीं जैसे बीज मन्त्रों के साथ डाकिनी शाकिनी कालका आदि शब्द बीच बीच में उसके मुँह से धीरे धीरे निकलने लगे । और वह झूमने सा लगा ।
उसके आसपास शमशान में विचरने वाले गण एकत्र होने लगे । मगर तांत्रिक से कुछ अनजाना भय सा खाते हुये वे उससे एक निश्चित दूरी पर ही रहे । तब कुछ बङे गण आये । और चोखा को अपने बदन पर प्रेत वायु के झोंको जैसा अहसास होने लगा ।
( यह अहसास इस तरह होता है । जैसे एक इंसान दूसरे इंसान की गरदन आदि पर हल्की सी फ़ूँक मारे । और ये अहसास अक्सर कान के पास ही गरदन तक अधिक होता है )
फ़िर उसके सामने शाकिनी आदि प्रत्यक्ष होने लगी । हड्डियों के कंकाल सी और कभी काली गन्दी सी वे स्थूल शरीरी सी भी दिखती औरतें निर्वस्त्र थी । उनके उलझे हुये बाल बहुत गन्दे और हवा में उङते थे । उनकी कमर पर नीच देवियों की भांति हड्डियों की मालायें भी बँधी थी । उनके काले स्तन नोकीले और तने थे । ऐसे बहुत से अन्य अनुभव चोखे को होते रहे । पर लपटा की बात को ध्यान रखता हुआ बहुत हल्का सा ही विचलित होता हुआ वह अपने काम में ही लगा रहा ।
यकायक ।
तभी मानों पंजामाली में बहार उतरी ।
छन छन छन छन..की मधुर लय ताल के साथ एक अनिद्ध सर्वांग सुन्दरी ने वहाँ कदम रखा । और चहलकदमी सी करते हुये मानों शमसान का निरीक्षण करने लगी । सारी प्रेतनियाँ अपनी जगह स्तब्ध खङी रह गयी । और सब कुछ भूलकर बस इस अदभुत नायिका को देखने लगी । जो मानों किसी परीलोक से परी की भांति अचानक उतर आयी हो । उसके जगमग जगमग करते सौन्दर्य से मानों अँधेरे में भी प्रकाश फ़ैल गया हो । शमशान जैसा स्थान भी स्वर्ग के उपवन में बदल गया हो ।

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