रविवार, अक्तूबर 16, 2011

अंधेरा 13

रात और अंधेरा । अंधेरा और रात । क्या सम्बन्ध है । इनका आपस में । देखने सुनने में ये बङी साधारण सी बात लगती है । पर वास्तव में ये बङी गहन बात है । अंधेरे के मजबूत आलिंगन में कसमसाती हु्यी जवान रजनी कैसे एक रोमांचक सफ़र तय करती है । कैसे उससे एकाकार होकर पूर्णता को प्राप्त होती है । यह रहस्य सिर्फ़ सफ़ल योगी ही जानते हैं ।  ये काली खूबसूरत निशा यौवन से भरपूर अपने अंग अंग में क्या क्या रस माधुर्य छिपाये है । ये इसके साथ रहने वाले योगी ही जान पाते है । इसकी कालिमा में एक अनोखी खूबसूरती और आकर्षण छुपा हुआ है ।
प्रसून किसी अंतरिक्ष केन्द्र से छोङे गये राकेट की तरह तीवृ गति से अंतरिक्ष में जा रहा था । उसके चारों तरफ़ गहरा काला काला काजल सा पदार्थ था । काले और गीले बर्फ़ीले घने ठण्डे बादलों में उसे कठिनाई सी हो रही थी । उसका योग प्रकाश और बल अभी इस स्तर की सूक्ष्म यात्राओं के लिये पर्याप्त नहीं था । वास्तव में उसे ऐसी यात्रा का जोखिम लेना भी नहीं चाहिये था । वह किसी ऐसी दूरस्थ सृष्टि में जा सकता था । जहाँ से फ़िर कभी उसके लिये लौट पाना संभव ही न हो । ऐसी हठ पूर्वक की गयी अनजानी योग यात्रा उसका योग बल समाप्त कर सकती थी । ये जीवन भी समाप्त कर सकती थी ।
पर ओमियो तारा के अनुभव से गुजरने के बाद उसने तय कर लिया था कि वह जिन्दगी का प्रत्येक खतरनाक अनुभव अब खतरनाक ढंग से ही करेगा । उसका अंजाम क्या होगा । अब इसकी उसे कोई परवाह ही नही थी । वह अब तक खामखाह की भूलभुलैया में था कि वह योगी है । अमर है । उसके जीवन पर उसका पूर्ण अधिकार है । और वह जीवन को अपने तरीके से निर्माण करेगा । जियेगा ।
पर वास्तव में अब वह जान गया था कि दूसरों की तरह वह भी महज एक खिलौना ही है । जिसका रिमोट दूर कहीं किसी के हाथ में है । अन्य आम इंसानों की तरह उसकी भी जिन्दगी कभी भी किसी मोङ पर खत्म हो सकती है । और तब इस धारणा से डरने के बजाय वह आंतरिक तौर पर और भी मजबूत हो गया था । और जिन्दगी का एक एक पल योग एडवेंचर के रोमांच में जीना चाहता था । वह किसी स्लाटर हाउस में कटे पशु की तरह अपने शरीर की बोटी बोटी का उपयोग दूसरों की भलाई के लिये करना चाहता था ।
और इसीलिये इस अदृश्य और अनजानी यात्रा में उसका क्या अंजाम होने वाला है । पता न होते हुये भी वह तेजी से मंजिल की और जा रहा था । उसका स्थूल शरीर बराङ साहब की कोठी के एक कमरे में बेड पर मृत समान पङा हुआ था । वह कमरा बाहर से लाक्ड था । उसकी चाबी जस्सी के पास थी । उसने जस्सी को कसम दी थी । उससे गाड प्रामिस लिया था कि चाहे दस दिन हो जायें । जब तक वह आवाज न दे । वह दरबाजा न स्वयं खोले । और न किसी को खोलने दे ।
हालांकि वे सब उस रहस्य से अधिक बैचेनी महसूस न करें । इससे उसने संकेत में बता दिया था कि वह कुछ दिनों के लिये योग समाधि में जा रहा है । और सिर्फ़ जस्सी की खातिर जा रहा है । और ऐसी हालत में देखना हिलाना डुलाना पुकारना उचित नहीं होता । वास्तव में उन्हें इस बात की बेहद उत्सुकता हुयी थी । पर मौके की नजाकत समझकर वे चुप ही रहे । और उसका कहा मानने में ही भलाई समझी । उनके घर में योग समाधि । शायद यही उनके लिये बहुत बङा अजूबा था ।
पर प्रसून के लिये ये साली जिन्दगी ही अजूबा बनी हुयी थी । क्या अजीब होती है । ये जिन्दगी भी । सिर्फ़ कुछ दिन पहले न कोई जस्सी थी । न उसका वो रहस्यमय केस था । न उसे कल तक पता था कि आज इस समय वह अंतरिक्ष की ऊँचाईयों पर अशरीरी जा रहा होगा । कहाँ जा रहा था वह । क्या पता । कहाँ जा रहा था ।
ये परसों रात की बात थी । कोई दस बजे वह जस्सी के रूम में लेटा हुआ था । बहुत धीमी आवाज में टीवी चल रहा था । जस्सी उसके पास ही बेड पर बैठी हुयी थी । वे दोनों अकेले थे । कल उसने बराङ साहब और राजवीर से स्पष्ट कर दिया था कि उसे जस्सी की समस्या किस तरह की मालूम होती है । और वास्तव में वह चाहता है कि एक बार पूरे जोर से जस्सी पर अटैक हो । जो वह उसकी रियल स्थिति को जान सके । अगर उनकी बेटी की किसी रहस्यमय वजह से मौत हो जाती है । उससे लाख गुना अच्छा है । उस वजह को जानकर उससे लङने की कोशिश की जाय । और बचने का रास्ता खोजा जाये । और इसके लिये उसका ज्यादा से ज्यादा जस्सी के पास रहना जरूरी था ।
दोनों को ये बात तुरन्त समझ में आयी । अगर कोई बाधा उनकी बेटी को मार भी सकती थी । तो फ़िर उनकी


लाडली बेटी अगर जिन्दगी के अन्तिम दिनों को भरपूर जीती थी । तो क्या हर्ज था । और ये बेचारा वो सिर्फ़ उनकी बेटी से एंजाय करने के लिये नहीं कर रहा था । उसने कम्प्यूटर पर उन क्लिप को चलाकर कई एंगल से मामले की गम्भीरता उनको समझाई भी थी कि ये कितना गम्भीर मामला था । दूसरे इस लङके में उन्होंने कोई छिछोरापन भी नहीं देखा था । तीसरे वह तो स्वयँ ही बङे ख्वाहिशमन्द थे कि वह जस्सी को पसन्द करने लगे । तो उनका जीवन ही सफ़ल हो जाये । और इसीलिये वह एक इज्जतदार दामाद के समान जस्सी के साथ उसके रूम में उसके बेड पर मौजूद था । जबसे उसने जस्सी के साथ सेक्स किया था । वह उससे बहुत शरमाने सी लगी थी । सब बातों से अनजान जस्सी उसे सिर्फ़ एक प्रेमिका के रूप में देखती थी । और वह उसे एक सफ़ल योगी की तरह किसी अदृश्य तिलिस्मी जाल में फ़ँसी खूबसूरत चिङिया के रूप में । खूबसूरत गोरी चिङिया । हरी आँखों वाली ।
अपनी बहुत कोशिशों के बाद वह सिर्फ़ इतना ही दृश्य देख जान पाया था कि किसी अज्ञात कारण से जस्सी की चेतना जब एक खास बिन्दु पर पहुँच जाती है । तब बवंडर उठता है । और फ़िर उसे तेज चक्कर सा महसूस होता है । उसका सर बहुत तेज चकराता है । और उसे दुनियाँ क्या पूरी सृष्टि ही घूमती हुयी उङती हुयी सी नजर आती है ।
स्वाभाविक ही ये भयंकर चक्रवाती तूफ़ान की स्थिति होती है । और उसमें घनघोर बारिश के साथ बिजली कङकङाती है । फ़िर जस्सी किसी दरिया में फ़ँसकर डूबने लगती है ।  तब उसे एक टार्जन लुक वाला युवा मछुआरा नजर आता है । वह उससे बचाने के लिये पुकारती है । बस ।
लेकिन इसके आगे क्या  रहस्य था । और ठीक यही दृश्य करम कौर को भी क्यों दिखायी दिया । उसे याद रहा । जबकि जस्सी को याद नहीं रहता था । ये बहुत से सवाल उसके जहन में थे । कामुक और लंपट बाबा गुरुदेव सिंह इस तिलिस्म जाल में फ़ँसकर अकाल मारा गया था । इसकी भी क्या वजह थी । ये सब खेल क्या था ? और सबसे बङी बात कहाँ से संचालित हो रहा था । इसके तार कहाँ से जुङ रहे थे । यह उसके लिये सबसे अहम प्रश्न था ।
इस सृष्टि में कोई भी रहस्य कितना ही बङा क्यों न हो । उसका कोई न कोई सूत्र कहीं न कहीं मिल ही जाता है । और फ़िर गुत्थी को सुलझाना ही शेष रहता है । कितनी मजे की बात थी । बीमार जस्सी के रहस्य का सिरा सूत्र उसे करम कौर के दिमाग से हासिल हुआ था । उसके दिमाग में वह AV फ़ाइल के समान मौजूद था । जबकि जस्सी के दिमाग में नहीं था । यही हैरत की बात थी । तब उसने बङी मुश्किल से सिर्फ़ अन्दाजा ही लगाया था कि दोनों के साथ एक ही घटना घटी थी ।
अब आगे का रास्ता भले ही अनिश्चित था । पर शायद उससे ही कुछ हासिल हो सकता था । वह पूरा बवंडरी दृश्य उसके दिमाग की मेमोरी के एक हिस्से में फ़ीड था । और किसी वीडियो क्लिप की तरह वह उसे बार बार चलाता हुआ यह पहचानने की कोशिश कर रहा था कि आखिर यह जगह कहाँ और कौन सी है ? अगर वह उस जगह से कनेक्ट हो सकता था । उसको पहचान सकता था । और वह उसकी  योग रेंज में आती थी । तो बात बन सकती थी ।
पर उसे बहुत झुँझलाहट सी हो रही थी । वह दृश्य उतना ही चलकर खत्म हो जाता था । और जो वह उसमें प्रवेश करने की चेष्टा कर रहा था । वह एकदम नाकाम ही सावित हो रही थी । सीधी सी बात थी । उसकी योग क्षमता अभी उतनी विकसित नहीं थी कि वह किसी अतीतकालिक घटना में सीधा ही हस्तक्षेप कर सके । ऐसी ही बारबार की कोशिशों में वह वहीं लेटा हुआ ट्रांस में जाता था ।
तभी उसे अपने शरीर से लिपटे एक कोमल बदन की गरमाहट सी महसूस हुयी । और उसकी क्षणिक विकल्प समाधि भंग हो गयी । उसने हौले से आँखे खौल दी । कमरे में अंधेरा फ़ैला हुआ था । सुन्दर जस्सी उसके साथ  किसी मासूम बच्चे की भांति लिपटी हुयी थी । उसने टीवी लाइट बन्द कर दी थी ।
ये उसके लिये एक साथ कई मोर्चों पर लङने जैसा था । एक योगी के स्तर पर किसी पिता के समान वह जस्सी की किसी मासूम बालक की भांति रक्षा करने को दृण संकल्पित हो चुका था । पर बारबार दिक्कत यही आती थी कि उसकी तरफ़ से भी इसी भाव में पूरा सहयोग होता । तब कुछ बात थी । पर वह तो प्रेमिका होने के अतिरिक्त कुछ सोचना ही नहीं चाहती थी । वास्तव में वह सो गयी थी । और उसका मासूम चेहरा किसी अबोध बच्चे के समान किसी सुन्दर सपने में खोये अहसास का भाव प्रकट कर रहा था ।
वह सावधानी से ऊपर खिसककर अधलेटा सा हुआ । और सिगरेट सुलगायी । इस तरह बात बनेगी नहीं । उसने सोचा । उसे किसी अलग कमरे में खास व्यवस्था के तहत गहन समाधि में जाना ही होगा । और कुछ % तक सच्चाई से जस्सी के परिजनों को परिचित कराना ही होगा । और फ़िर उसने यही किया था ।
और परिणाम स्वरूप इस विशाल अंतरिक्ष के रहस्यमय अंधेरे में भटक रहा था ।
और तब अचानक वह बुरी तरह चौंका । जब उत्तर दिशा में किसी नीच लोक से उसे तेज बवंडर उठता नजर आया । वह उस बवंडर से बहुत ऊँचाई पर था । उसके नीचे बादल गहराने लगे थे । उज्जवल उजास दामन वाली दामिनी अपना भरपूर कटाक्ष फ़ेंकती थी । और आकाश में कङकङाहट सी गूँज जाती थी । क्या चपल देवी होती है । ये चपला भी । उसने सोचा । ये अनिंद्ध सुन्दरी उच्च देवों को भी सिर्फ़ आह भरने पर मजबूर अवश्य करती थी । पर उसे छू पाने की भी हिम्मत उनके अन्दर नहीं थी । क्योंकि उसे छूना आसान नहीं था । बल्कि संभव ही नहीं था । वह सिर्फ़ अद्वैत शक्तियों की दासी थी । और विशेष कार्यों हेतु मुक्त विचरण पर निकलती थी । उसने सोचा । जिन चेतन पुरुषों को ये नायिका सुख पहुँचाती होगी । उसका आनन्द न सिर्फ़ अवर्णनीय होगा । कल्पनातीत भी होगा । जिसका एक मादक कटाक्ष ही बृह्माण्डी गतिविधियों में तमाम परिवर्तन कर देता है । अंतरिक्षीय हलचल में उलट फ़ेर कर देता है । उस सुन्दरी की बस कल्पना ही की जा सकती है ।
पर अभी ये सब सोचना उसके कार्यकृम का हिस्सा नही था । उसे उस बवंडर से खास मतलब था । और इसके लिये उसे वापिस नीचे उतरना था । और फ़िर उसने वैसा ही किया । उसकी गति नीचे की तरफ़ होने लगी । वह बादलों के झुण्ड में खोता चला जा रहा था ।

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