रविवार, अक्तूबर 16, 2011

अंधेरा 16

- बाबा ! वह भावुक होकर बोला - अपनों का गम । उनके बिछुङने का गम । शायद सबसे बङा होता है । भले ही अपनों से बिछङा इंसान जन्म दर जन्म कालखण्डों के तूफ़ानों में अपनी डगमगाती कश्ती यहाँ से वहाँ ले जाता रहे । जुदाई की ये तङप । विरहा की ये आग । उसके अन्दर कभी नहीं बुझती । माया के वशीभूत जीवात्मा पिछली बातों को भूल अवश्य जाता है । पर एक अज्ञात सी हूक उसके कलेजे में जागती  रहती है । क्या अजीव विधान है सृष्टि रचियता का । इंसान अपने बीबी बच्चों में खुश होता है । जीवन की बगिया में महकते फ़ूल खिल रहे होते हैं ।  उसका युवा जवान पुत्र होता है । और उस पुत्र की बहुत सुन्दर पत्नी या प्रेमिका होती है । उसकी खुद की भी पत्नी होती है ।
वह अमीर होता है । या गरीब होता है । इससे ज्यादा मतलब नहीं होता । वह अपनी जीवन की फ़ुल बगिया में सुखी ही महसूस करता है । पर कितना अजीब है ना । तब एक.. तूफ़ान आता है । प्रलयकारी तूफ़ान...।
अचानक बूङे का बदन हिलने लगा । उसने ढोल बजाने वाली लकङी उठा ली । उसके बूङे हाथ तेजी से कांप रहे थे । प्रसून अन्दर ही अन्दर सन्तुष्ट हुआ । पर अभी भी मामला खराब हो सकता था ।
- और वह तूफ़ान । वह फ़िर से सधे स्वर में बोला - कभी कभी जिन्दगियों को उजाङ देने वाला होता है । हँसती खेलती जिन्दगी उजाङ देने वाला तूफ़ान..बिजली कङकङाती है ..और फ़िर..।
बूङे का हाथ हिला । उसकी गर्दन हिल रही थी । और फ़िर मुठिया वाली लकङी की थाप ढोल पर पङी । ढमऽऽ की आवाज गूँजी । मौजूद स्त्री पुरुषों के चेहरे पर अजीव सी रौनक खिल उठी । वे इस जादुई पुरुष को गौर से देख रहे थे ।
- किसी की बीबी ! वह फ़िर से बूङे को गौर से देखता हुआ भावुक होकर बोला - किसी का जवान बेटा । किसी का पति । और किसी की प्रेमिका भी..ये तूफ़ान..भयानक जंगलों में ..
ढम ढम..ढमाढम..बूङा तेजी से हाथ चला रहा था । अब प्रसून की बातों से उसका ध्यान हट चुका था । क्या अजीव जादू था । उस ढोल की लय में । सब उसकी बातें सुनना छोङकर ढोल में मगन हो गये । प्रसून रहस्यमय मुस्कराहट के साथ उन सबको देखने लगा । उसका उद्देश्य पूरा हो चुका था । देखते हैं । आगे क्या होता है । उसने सोचा । बूङा दर्द भरी आवाज में कोई गीत गा रहा था । और वे लोग भीगी आवाज में उसकी किसी मुख्य कङी में सुर मिलाते थे । वे प्रसून को भूल सा गये थे । उसे गीत के बोल और उसका अर्थ समझ नहीं आ रहा था । पर आवाज का गहरा दर्द एक अंधा भी महसूस कर सकता था ।
ये आवाज मानों आत्मा की आवाज थी । तब उसने दर्द की आवृति का गोल छोटा सा भंवर बनते देखा । उसके गानों में रूसी गाने की तरह एक अजीव सी शैली समायी हुयी थी । जो गाते वक्त रोने की फ़ीलिंग देता था । तभी बाहर की तरफ़ से कुछ शोर सा सुनाई दिया । उसे जस्सी द्वारा खुद को पुकारने की आवाज सुनाई दी ।
- सत्यानाश ! उसके मुँह से निकला । सब किया कराया चौपट हो गया था । पूरी मेहनत पर पानी फ़िर गया था । अन्य लोग भी चौंककर उधर ही देखने लगे । व्यवधान आते ही बूङे ने ढोल फ़िर बन्द कर दिया था । उसका भाव रुक गया । बाहर कुछ गणों के साथ जस्सी खङी थी । वे किसी कैदी की भांति उसे पकङे हुये थे ।
वह तुरन्त वहाँ पहुँचा । जस्सी बङी हैरत से उसे देख रही थी । और खुशी से उससे लिपट जाना चाहती थी । उसने एक गहरी सांस भरी । क्या सब कुछ खत्म होने वाला था । कितना बङा हस्तक्षेप हुआ था । बस एक घण्टे भी और वही स्थिति रहती । तो सब कुछ खुली किताब की तरह हो जाने वाला था ।
- महोदय ! एक प्रहरी बोला - आप कोई योगी मालूम होते हैं । पर कृपया आपको प्रेतराज को सूचना देकर उनकी जानकारी में आना चाहिये था । क्या इस जीवात्मा से आपका कोई सम्बन्ध जुङता है ? आपके यहाँ आने का उद्देश्य क्या है ? ये देवी कौन है ? आप कब तक यहाँ रहने वाले हैं ?
उसने जस्सी को देखा । कमाल की लङकी थी । कैसे उसके पास एक जादू की तरह आ गयी थी । और मुश्किल बात ये थी कि अभी यही नहीं पता था कि वो जिन्दा थी । या मर चुकी थी । पर प्रहरी को उसके मनोभावों से कोई मतलब नहीं था । उसे अपने उत्तरों की शीघ्रता थी । वह जानता था कि उसकी जगह कोई रूह भटकती हुयी गलती से इधर पहुँच जाती । तो ये पहरेदार तुरन्त उसे कैद कर लेते । जैसे जस्सी अभी कैद थी । पर वे योगियों के लिये नियम जानते थे ।
- उसे छोङ दो । वह जस्सी की तरफ़ देखता हुआ बोला - वो मेरी प्रेमिका है । उसी की बाधा के चलते मैं यहाँ आया हूँ । दरअसल मैं अपने अभियान के बीच यकायक यहाँ आया । मुझे इसकी अभी की स्थिति का भान था । मैं अपने अभियान के पूरा होते ही वापिस जाऊँगा । ये लङकी और मैं दोनों बाहरी व्यक्ति हैं । इसके अलावा हमारे

साथ कोई नहीं है । तब तक तुम हमारे बारे में यही से पता कर सकते हो । क्योंकि इस बाधा का सम्बन्ध यहीं से है । वैसे तुम जानते ही होगे । फ़िर भी हम दोनों प्रथ्वी से हैं । अनावश्यक चिंता न करो । हम यहाँ कोई परेशानी वाली बात नहीं करेंगे । प्रेतराज को मेरा नमस्कार कहना ।
ये सब बात उसने विशिष्ट अन्दाज में सूक्ष्म लोकों में योगियों की स्थिति अनुसार कही थीं । वे तुरन्त समझ गये । और आदर के साथ उन्होंने जस्सी को छोङ दिया । वह दौङकर प्रसून से लिपट गयी । लोक वायु प्रहरियों ने उसका अभिवादन किया । और वापिस चले गये ।
चाहे वह मामूली चींटी चींटा हो । इंसान हो । या फ़िर देवतुल्य बङी शक्तियाँ ही क्यों न हों । हरेक का जीवन शतरंज पर बिछी बिसात के समान है । एक मामूली मोहरे के इधर से उधर होते ही जिन्दगी के खेल की पूरी चाल ही बदल जाती है । और तब बङे से बङे खिलाङी के माथे पर बल पङ जाते हैं । एक चाल हजारों नई चालों को जन्म देती हुयी आती है । अब क्या हो ? कैसे हो । ऐसा हो । तो वैसा हो । वैसा हो । तो ऐसा हो । फ़िर भी पता नहीं । उसका परिणाम कैसा हो । कभी कभी कितना असहाय महसूस होने लगता है । जब किसी बङे मोहरे से जूझता राजा भी थोङी सी लापरवाही से मामूली पैदल सैनिक के निशाने पर मरने को मजबूर होता है । राजा हो या रंक सभी का अन्त एक सा होय ।
अंधेरा गहराने लगा था । पहले से ही अंधेरे इस लोक में रात होने लगी थी । सो उसकी प्रारम्भिक अवस्था ही प्रथ्वी की आधी रात के समान थी । वह और जस्सी बाहर ही खुले में मिट्टी के चबूतरे पर बैठ गये थे । उन्होंने किसी सोलर सिस्टम के उपकरण की भांति किसी अजीव से साधन से प्रकाश किया था । जिसका उजाला अधिक नहीं पर पर्याप्त था । उसे सिगरेट की भी तलब महसूस हो रही थी । पर इस तलब को पूरा नहीं कर सकता था ।
बूङा मिचमिची आँखों से उन्हें ही देख रहा था । अन्य लोगों को भी उत्सुकता थी । कुछ और लोग भी आने लगे थे । वे यह सब जानना चाहते थे । पर वह क्या बताता । और कैसे बताता । और बताने का शायद टाइम भी नहीं था । उसने जस्सी की तरफ़ देखा । तो उसने शरमाकर नजरें झुका लीं ।
अजीव पागल है । पहले उसने सोचा । ये प्रथ्वी से बहुत दूर कितनी अजीव स्थितियों में है । फ़िर भी कैसी निश्चिन्त सी थी । फ़िर उसे लगा । पागल बह नहीं । बल्कि वह स्वयं पागल है । जब उसने इधर का सफ़र किया होगा । भले ही वह जीते जी या मरे हुये किया होगा । तब उसके दिलोदिमाग में सिर्फ़ वही छाया होगा । वह उससे किसी पूर्ण समर्पित प्रेमिका की तरह एक भाव हो गयी होगी । तब रास्ते में जो भी व्यवधान या डरावनी परिस्थितियाँ बनी होगी । उसका ध्यान सहायता के लिये उसी की तरफ़ गया होगा । तब सूक्ष्म शरीरी होने से उसकी आसान योग स्थिति बनी होगी । और इस तरह उसका एक विशिष्ट वी आई पी दर्जा बन गया होगा । इससे तमाम बाधक तत्व उससे स्वतः दूर हो गये होंगे । दूसरे उससे एकभाव होने से उसके सूक्ष्म शरीर में योगत्व प्रभाव खुद भी पैदा हो गया होगा । तब उसे ये मरना या ये यात्रा भी रोमांचक ही लगी होगी । एकाएक उसके दिल में जस्सी के लिये प्यार सा उमङा । और उसने उसके गले में बाँहें डालकर उसे अपने साथ सटा लिया । वह किसी भयभीत चिङिया सी उसके सीने से लग गयी ।
कितनी मजे की बात थी । वह उसके होते निश्चिन्त थी । और कुछ भी नहीं सोच रही थी । जबकि वह उसके होते परेशानी में उलझा हुआ था । और लगातार उसी के बारे में सोच रहा था । बात शायद अभी वहीं के वहीं थी ।

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