रविवार, दिसंबर 18, 2011

लक्ष्मण रेखा 4

आसमान में तेज गङगङाहट होने लगी । और कुछ ही पलों में ऊँचाई पर एक हैलीकाप्टर हवा में आकर ठहर गया । हैलीकाप्टर से एक रस्सा नीचे फ़ेंका गया । और फ़िर दो साये उस रस्से पर झूलते हुये से नीचे आने लगे । कुछ ही मिनटों में वे जमीन पर उतर गये । हैलीकाप्टर वापस मुङा । और दूर जाता हुआ आसमान के अँधेरे में खो गया ।
उतरने वालों में एक जवान युवक और युवती थे । उन्होंने अपने कन्धे से बैग उतार कर फ़ेंक दिये । और लगभग अँधेरे से घिरे उस स्थान पर मौजूद टार्च की सहायता से इधर उधर देखा ।
- वाह । युवती खुशी से उछलकर अंग्रेजी में बोली - कितनी सुन्दर जगह है ।
युवक ने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया । उसने एक सिगरेट सुलगाई । और गम्भीरता से कश लगाने लगा । तभी दूर से आती हुयी वाहनों की हैडलाइट उन्हें नजर आयी ।
मध्य प्रदेश का घना जंगल - अमरकन्टक । ये जंगल बहुत घना है । और निर्जन भी । इसमें कई किस्म के पेङों की बहुतायत है । यहाँ बाँस बहुत हैं । बहुत ही घने बाँस के झुण्ड आम हैं । जंगल के अन्दर कही न कहीं जंगली बाघ भी है । अन्य वनों की तरह छोटे मोटे जानवर नहीं हैं । शेर अधिक हैं ।  इस विशाल जंगल के बहुत से अन्दरूनी रास्तों पर गाङी आदि नहीं जा सकती । अजीब से रास्तों के कारण पैदल ही चलना पडता है । अमरकन्टक में मौसम प्रायः हल्का बारिश टायप रहता है । अक्सर थोडी बहुत बूँदा-बाँदी होती रहती है । जंगल में दलदली क्षेत्र भी बहुत है । जहाँ बहुत गीली मिट्टी होती है । अगर कोई उसमें गिर जाये । तो बाहर नहीं निकल पाता । और अन्दर ही अन्दर  धँसता जाता है ।
इसी जंगल के पास से नर्मदा नदी गुजरती है । नर्मदा बहुत बङी नदी है । ये मध्य प्रदेश की सबसे बडी नदी है । इसके प्रारम्भ से लेकर अन्त तक । इसके रास्ते में बहुत से छोटे बडे जिले आते है ।
इसको सुन्दर जगह बता रही है । उसने सोचा । कितना भयानक वातावरण है । तमाम रात्रिचर जीवों कीट पतंगो की सयुंक्त डरावनी आवाजें गूँज रही हैं । हाथी जैसे प्रतीत होने वाले डांस मच्छर भनभनाते हुये आक्रमण कर रहे हैं 


। दूर दूर तक इंसान नजर नहीं आ रहा । आसपास खङे वृक्ष भी डरावने प्रेत से मालूम होते थे । और इस लङकी को ये सब इतना सुन्दर रोमांचक लग रहा था कि वह प्रफ़ुल्लित हो रही थी ।
अँधेरे को चीरती हुयी सी वाहनों की लाइट बिलकुल पास आती जा रही थी । और फ़िर वह दोनों गाङियाँ  उनके पास आकर रुक गयी । वह एक बङी । महंगी । और आलीशान कार थी । और दूसरी सूमो थी ।
- ईवनिंग सर ! दोनों को अभिवादन करने के बाद कार से निकले ड्राइवर ने सेलफ़ोन पर कोई नम्बर मिलाया । उसने कुछ सेकेण्ड तक बात की । फ़िर फ़ोन युवक की तरफ़ बढा दिया । संक्षिप्त में यस..ओके करते हुये उसने फ़ोन सुना । और वापिस कर दिया । फ़िर वे दोनों आदमी सूमो से वापिस हो गये ।
- प्रसून जी ! दोनों के कार में आने के बाद युवती बोली - इसी को कहते हैं ना । जंगल में मंगल । कल्पना करो । हम हनीमून कपल होते । तो सब कुछ कितना रोमांचक था ।
उसका दिल हुआ । जोरदार ठहाका लगाये । गाङी में रखी इमरजेंसी लाइट जलने से आसपास का अँधेरा दूर हो गया था । बैंगलौर से यहाँ तक का हेलीकाप्टर से सफ़र भी थकान युक्त और बोझिल था । लेकिन लङकी मनवांछित की प्राप्ति से ऊर्जा से भरपूर थी । और किसी उल्लसित बच्चे की भांति कोई थकान महसूस नहीं कर रही थी ।
 - लिली ! वह अपने मनोभाव प्रकट किये बिना ही बोला - तुम्हें अब जल्द शादी कर लेनी चाहिये । उससे पहले कि कोई प्रेत तुम पर आशिक हो जाये ।
लिली एक हालीवुड एक्ट्रेस की दूसरी शादी से उत्पन्न सबसे बङी पुत्री थी । और लास एंजिल्स की रहने वाली थी । वह 23 आयु को पार कर रही थी । पर न तो उसने अभी तक शादी की थी । और न ही उसका कोई ब्वाय फ़्रेंड था । उसकी माँ का वास्तविक नाम मारग्रेट था । और वह हालीवुड की सफ़लतम अभिनेत्रियों में से एक थी । उसका असली पिता भी हालीवुड फ़िल्म इण्डस्ट्री से जुङा था ।
अमेरिकन आवोहवा में पली होने के बाबजूद भी लिली विचित्र स्वभाव वाली थी । और आदमियों से सख्त नफ़रत करती थी । अक्खङ स्वभाव की लिली को आज तक कोई पुरुष स्पर्श तक न कर पाया था । जिसके पीछे सिर्फ़ एक खास वजह थी । एक चिढ थी । एक मनोग्रन्थि सी बन गयी थी ।
और वह थी । किसी भी लङके से हाय होते ही उसका दूसरा स्टेप लङकी के टाप में हाथ डालने का होता था । और थर्ड स्टेप सेक्स का । पागल साले कुत्ते । वह झुँझलाती । इससे पहले लङकी को समझने की कोशिश तक नहीं करते ।
लेकिन प्रसून के सम्पर्क में आकर पुरुषों के प्रति उसकी पूरी धारणा ही बदल गयी । प्रसून से उसकी सीधी सीधी कोई पहचान नहीं थी । बल्कि उससे उसकी मुलाकात मार्था के घर हुयी थी । प्रसून से मार्था का परिचय एक 


साइंटिस्ट के तौर पर था । और मार्था लिली की सबसे खास सहेली थी ।
- मार्था ! एक दिन लिली हैरत से बोली - ये तेरे घर में जो गेस्ट है । ये वाकई में इंसान ही है । या कोई एलियन है । या फ़िर रोबोट है ? ये आखिर चीज क्या है ?
- मुर्दा ! मार्था बालों को पीछे फ़ेंकते हुये बोली - चलता फ़िरता मुर्दा । या प्रकट रूप प्रेत ।
प्रेत शब्द सुनते ही लिली के दिल में घण्टियाँ सी बजने लगी । अब उसने गौर से उस हैंडसम को देखा । कन्धों तक फ़ैले लम्बे बाल । गजब की अंग्रेजों सी गोरी रंगत । उफ़ ! वह भी कितनी पागल थी । जो इसे अभी तक गौर से देखा नहीं था । बिलकुल हेल्दी माइकल जेक्सन सा वह कुछ दूर एक तरफ़ लेपटाप से फ़ालतू में उलझा हुआ था । तब । जब दो हसीन जवान लङकियाँ उस कक्ष में मौजूद थी ।
तब मार्था को गोली मारती हुयी वह उसकी तरफ़ गयी । और हाय किया । उसने शालीनता से मुस्कराते हुये प्रत्युत्तर दिया । और वापिस स्क्रीन देखते हुये माउस एडजस्ट करने लगा ।
अपनी अब तक की जिन्दगी में लिली की इससे अधिक बेइज्जती कभी न हुयी थी । उसने लिली को एक भरपूर निगाह देखना भी उचित नहीं समझा था । मार्था मन ही मन अट्टाहास करती हुयी जबरदस्ती होंठ भींचे सिगरेट सुलगाने लगी । आज आ ही गया ऊँट पहाङ के नीचे । उसने सोचा ।
वापस उसके पास आ गयी लिली के चेहरे पर भारी खिसियाहट के भाव मौजूद थे । मार्था अच्छी तरह से न सिर्फ़ उसके मनोभाव समझ रही थी । बल्कि उसे खूब मजा भी आ रहा था । आखिर वह सात साल से प्रसून के सम्पर्क में थी । और उसके स्वभाव को भलीभांति पहचानती थी ।
- सही हो तुम । लिली झेंपती सी बोली - वाकई मुर्दा । मार्था ! फ़िर वह फ़ुसफ़ुसाकर बोली - तूने इसे अन्दर से देखा है कभी ।  ये बाउंड्री के बाहर वाला सिक्सर तो नहीं है । बट यार ! वो पर्सन तो स्त्री पुरुष से भी अधिक रोमांटिक होते हो । उफ़ ! लगता है । पागल हुयी मैं ।
और तब न चाहते हुये भी मार्था का ठहाका निकल ही गया ।
- प्रसून जी ! तब वह अपेक्षाकृत कुछ ऊँची आवाज में लिली के माता पिता का स्क्रीन नाम बताती हुयी उस परिचय से बोली - ये मेरी सहेली लिली है ।
- ओह ! वह फ़िर से उनकी तरफ़ मुढा - नाइस टु मीट यू डियर । और वापिस की दबाने लगा ।
- लगता तो नहीं । वह झुँझलाकर बहुत धीरे बोली - खुश हुआ । भाङ में जा साले । ठीक बोली तू । मुर्दा ।
मार्था अच्छी तरह जानती थी । उसका सात साल का अनुभव था । जब भी वह उसके पास होता था । उसने कई बार संकेत किये थे । पर प्रसून ने उसे किस तक नहीं किया था । और सबसे बङी बात वह बेहद रहस्यमय था । वह उसके बारे में कुछ भी तो नहीं जान पायी थी । सिवाय एक भले इंसान । और कुशल बैज्ञानिक के ।
लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था । लिली जब उसे व्यर्थ ही हजारों हजार गालियाँ मन ही मन देती हुयी दूसरी बातों की तरफ़ ध्यान लगाने की कोशिश कर रही थी । तब यकायक प्रसून का ध्यान खुद ही उनकी तरफ़ आकर्षित हुआ । वे दोनों उच्च स्वर में बात कर रही थी । मानों झगङा सा कर रही हों ।
- लिली । मार्था उत्तेजित सी कह रही थी - तू शर्त लगा ले मुझसे । भूत प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती । यार दुनियाँ चाँद तारों पर पहुँच गयी । और तू प्रेतों की तलाश में लगी है । हद होती है किसी बात की ।
लेकिन लिली पर कोई असर न हुआ । इस मुद्दे पर वह एकदम शान्त थी । और जैसे पूर्ण निश्चिंत थी । यही वो पल था । जब दोनों की जानकारी के बिना प्रसून काम रोक कर उनकी तरफ़ देखने लगा था ।
- मार्था ! आज तू मेरी बात को नोट कर ले । लिली पूरी गम्भीरता से दृण स्वर में बोली - मैं तुझे भूत प्रेतों के होने का सबूत भी दूँगी । बल्कि संभव हो सका । तो दिखाऊँगी भी । क्योंकि मैंने उन्हें खुद देखा है । और कई बार महसूस किया है ।
इसी बात से प्रसून के कान खङे हो गये । उसने लङकी के स्वर में छुपी दृणता साफ़ महसूस की । और ये बात बहुत खतरनाक थी । एक और हँसता खेलता जीवन । अनजाने ही प्रेतत्व की ओर बढ रहा था । वन वे । जिस पर वापिसी का कोई आप्शन ही नहीं होता । और क्या पता । कितना बढ गया हो । तब योगी का नैतिक कर्तव्य जागृत हो उठा । और उसने सामान्य जिज्ञासा सी प्रदर्शित करते हुये उससे बातचीत शुरू कर दी । अब मार्था हैरान हो रही थी । एक तो पहले से ही पागल थी । और दूसरे के पागल होने की शुरूआत हो गयी ।
उसने रिस्टवाच पर दृष्टिपात किया । नौ बजने वाले थे । लिली कार से बाहर निकल गयी थी । और उसी हल्के उजाले में इधर उधर चहलकदमी सी कर रही थी । प्रसून भी बाहर निकल आया । और निरुद्देश्य सा ही टहलने लगा । वह पहली बार ही यहाँ आया था । इस स्थान के बारे में लिली के किसी परिचित ने ही सुझाया था । प्रसून अभी बंगलौर में ही था । जब लिली उसे सूचना देकर आ पहुँची । फ़िर आनन फ़ानन प्रोग्राम तय हुआ । और दोनों यहाँ आ गये । यहाँ तक पहुँचने की सब व्यवस्था और गाङी आदि का इंतजाम भी उसी परिचित द्वारा कराया गया था ।
उसका खुद का यहाँ आने में कोई इंट्रेस्ट नहीं था । पर वह जानता था । लिली जिद्दी थी । और किसी भयानक मुसीबत में फ़ँस सकती थी । उसके मना करने की सूरत में वह किसी और साथी को चुन लेती । और दोनों प्रेत खोजी अभियान पर निकल जाते । प्रेत । क्या यहाँ वाकई प्रेत हो सकते हैं । प्रेतवासा जैसा कोई अनुभव अभी तक तो उसे नहीं हुआ था । और ये अच्छा ही था । वह लिली को दो तीन दिन घुमाता । और उसके दिमाग का फ़ितूर शान्त करके वापिस अमेरिका भेज देता ।
- लिली । फ़िर वह कुछ सोचता हुआ बोला - तुम वाकई खुशकिस्मत हो । जो तुमने न सिर्फ़ प्रेत को महसूस किया । बल्कि उसे देखा भी । इनफ़ेक्ट कभी मैं भी इस खोज के प्रति बहुत उत्सुक था । पर अफ़सोस । अभी तक प्रेत के नाम पर मैंने हाथी का बच्चा तो दूर । चींटी का बेबी भी नहीं देखा । कैसा था वो प्रेत । जो तुमने देखा ।
- तुम्हारे जैसा । वह सपाट स्वर में बोली - सच कहती हूँ । बिलकुल तुम्हारे जैसा । साला एकदम मुर्दा । मानवीय भावनाओं से रहित । और सुनिये मिस्टर प्रसून । मैं कतई खुशकिस्मत नहीं हूँ । बल्कि बहुत ही अनलकी हूँ । वो भी ओनली एण्ड अगेन ओनली तुम्हारी वजह से । न न चौंकों मत श्रीमान । अब तक अपनी जिन्दगी में आये प्रवेश के इच्छुक हजारों पुरुषों को मैंने देखना भी उचित नहीं समझा । अमेरिकन और हालीवुड संस्कृति में शायद मैं ऐसी एकमात्र लङकी हूँ । जिसे इस आयु तक एक स्वीट किस का भी अनुभव नहीं । फ़िर कौमार्यता की बात तो जाने ही दो ।
दरअसल खुद मुझे भी । मेरे लिये अज्ञात वजह से । मैं पुरुषों से घोर नफ़रत करती हूँ । हमेशा मेरा दिल करता है कि उन्हें एक क्यू में खङा करके गोलियों से भून दूँ । तुम विश्वास नहीं करोगे । इसी इच्छा पूर्ति के लिये मैंने चाइनीज जेलों में नौकरी हेतु एप्लाई किया था । बिकाज वहाँ मृत्यु दण्ड प्राप्त अपराधियों को गन से शूट किया जाता है ।
- ओ भगवन ! प्रसून जैसे थरथरा गया - शायद इसी को कहते हैं - खतरनाक सुन्दरी । वैसे प्लीज । मुझे सच बताओ । अभी यहाँ तुम कोई गन वन तो नहीं लायीं ।
- फ़िक्र न करो । वह लापरवाही से बोली - वैपन हमेशा मेरे पास होता है । पर आपको कभी नहीं मार सकती मैं । बिकाज तुम मेरे सबसे बङे दुश्मन हो । और दुश्मन के मर जाने से जिन्दगी का रोमांच ही खत्म हो जाता है । मैं तुम्हें परास्त करके रहूँगी । ये मेरी जिन्दगी का एक मुख्य उद्देश्य है । हाँ मैं तुम्हें मार के ही मानूँगी । पर किसी बुलेट के इस्तेमाल से नहीं । बल्कि अँखियों की गोली से । यौवन से । अदाओं से । और.. और अगर मैं हार गयी । तो ये पूरी स्त्री जाति की हार होगी । अपने तीन साल के तुम्हारे साथ सम्पर्क में । मैंने ऐसा अदभुत इंसान जिन्दगी में नहीं देखा । जिसकी मुझमें कोई जरा भी दिलचस्पी नहीं जागी । आखिर तुम अपने आपको समझते क्या हो । यू..यू..यू..डफ़र रास्कल ?
वह एकदम आश्चर्यचकित रह गया । क्या छुपा था । इस लङकी के दिल में । उसके प्रति । वो भी बिना वजह । शायद इसी को कहते हैं - आ वैल मुझे मार । ओह गाड । अपनी किसी मनोग्रन्थि के चलते ये साइलेंट मर्डर भी कर सकती थी । वह सच में उत्तेजित थी । तमतमा रही थी । और निसंदेह सामान्य हालत में नहीं थी । अच्छा हुआ । उसने अपने उदगार जता दिये थे । अब वह सचेत रह सकेगा ।
- ओ रिलेक्स लिली । वह प्रत्यक्ष शान्त स्वर में बोला - ऐसा कुछ भी नहीं हैं । तुम भी जाने क्या क्या सोच बैठी । मुझे तुम सुन्दर गुङिया सी लगती हो । आकर्षक लगती हो । पर मैं खुद हीनता से गृस्त हूँ । अपनी कुरूपता अहसास का बोध मुझ पर हमेशा हावी रहता है । इसके ही चलते मैं सुन्दर लङकियों को देखकर हमेशा नर्वस हो जाता हूँ । इसके ही चलते मैं तीस से ऊपर होने पर भी शादी न कर सका । दरअसल मेरी कुरूपता का बोध । किसी स्त्री की समीपता होते ही । मुझ पर बुरी तरह हावी हो जाता है । और तब मेरा शरीर । मेरी भावनायें । सब मुर्दा हो जाती हैं । तब मैं अपनी अभी तक तो न हुयी पत्नी के लिये भी बेकार ही हूँ । जबकि एक सफ़ल पति छोङो । पति वाली भी योग्यता मेरे पास नहीं । प्लीज तुम मेरी फ़ीलिंग्स कमजोरी समझने की कोशिश करो । बिना हथियार के युद्ध नहीं लङा जा सकता । युद्ध । तुम समझ रही हो ना ।
लिली के जबरदस्त अट्टाहास उस वीराने में गूँजने लगे । उसकी हँसी रोके ना रुकी । वह हँसती ही चली गयी । हँसती ही चली गयी । प्रसून बगलोल सा मुँह बनाये उसे हैरानी से देखने लगा ।
- वाकई । वह हँसी के बाद भी हँसते हुये ही बोली - वाकई अदभुत हो तुम । मार्था ने तुम्हारे बारे में सब कुछ सही ही बताया था । अरे बांगङू । तू कभी आइना नहीं देखता क्या । तुझे देखकर माइकल जैक्सन भी जिन्दगी भर के लिये अपने प्रति हीनता का शिकार हो जाता । तुम अगर रेड कारपेट पर एक बार पहुँच जाओ । तो ये हालीवुड के चिकने हीनता का शिकार हो जायें । तमाम हीरोइनें तुम्हारी एक झलक के बाद तुम्हें भूल नहीं सकती । कोई भी स्त्री तुम्हें देखते ही पिघलने लगती है । वह अपने अस्तित्व को भूल जाती है । और सिर्फ़ तुम्हारे लिये दिलोजान से मिट जाना चाहती है । साले ऐसा ही है तू । बिना बोले । बिना देखे । भङकाने वाला । आय.आय किल ..यू साले ।
उसने बेबसी से हथेलियाँ रगङी । अब उसे बेहद अफ़सोस हो रहा था । जो वह अपनी क्षणिक भावुकता के बहाव में उसके साथ आने का निर्णय कर बैठा । और अब जा भी नहीं सकता था । वह उससे बहुत कुछ कहना चाहता था । समझाना चाहता था ।
पर उस वक्त इतना ही कह सका - शायद इसी को अतिश्योक्ति वर्णन कहते हैं । प्रभावित इंसान की अति और अँधी भावना । पर वास्तव में यह तुम्हारी बहुत बङी गलतफ़हमी ही है । मैं सच कह रहा हूँ लिली ।
- ओके ओके । वह लापरवाही से बोली - अभी बहस बन्द करो । अब मैं सोने जा रही हूँ । और तुम मेरे सोने का कोई नाजायज फ़ायदा उठाने की कोशिश मत करना । क्योंकि जब भी मारूँगी । मैं ही तुम्हें मारूँगी । तुम नहीं । और याद रखना । लिली इतनी भी सिली नहीं । जो तेरी झूठी बातों पर यकीन कर ले ।
- नो नो नेवर । वह सहम कर बोला - मेरी इतनी हिम्मत नहीं । जो मैं ऐसी कोई जुर्रत करूँ ।
रात का यौवन खिलता जा रहा था । वह अँगङाई लेती हुयी निरन्तर जवान हो रही थी । लिली गाङी में जाकर शायद सो गयी थी । और वह पागलों के समान उस खुले वीराने में टहल रहा था । सब कुछ उसकी सोच के विपरीत था । चौंका देने वाला था । जिसे वह साधारण भूत पर्यटन समझ कर यूँ ही आया था । वह गम्भीर था । लङकी मानसिक रूप से एक प्रकार की विक्षिप्त थी । और कुछ भी कर सकती थी । कुछ भी ।
क्या कुछ भी ? पता नहीं । कैसे पता लगे ? इसका भी पता नहीं । इसका इरादा क्या था ? नहीं पता ।

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