रविवार, फ़रवरी 27, 2011

श्री नीलकण्ठ महादेव जी के दर्शन

दोस्तों आज सोमवार का दिन है । तो सोच रहा हूँ । आपको नीलकण्ठ महादेव जी के दर्शन करा दूँ । जहाँ आप लोग गए तो होंगे । पर ठीक से नीलकण्ठ महादेव जी के दर्शन नहीं कर पाए होंगे । आज मैं आपको नीलकण्ठ महादेव जी के दर्शन करवाऊंगा । आज मैं अपने ब्लॉग पर नीलकण्ठ महादेव जी के ऐसे फोटो दे रहा हूँ । जो आपको कभी नहीं मिलेंगे । आप इन फोटो को अपने मंदिर में भी लगा सकते है ।
भगवान की प्रतिज्ञा ।

मेरे मार्ग पर पैर रखकर तो देख । तेरे सब मार्ग न खोल दूँ तो कहना ।
मेरे लिए खर्च करके तो देख । कुबेर के भंडार न खोल दूँ तो कहना ।
मेरे लिए कडवे वचन सुनकर तो देख । कृपा न बरसे तो कहना ।
मेरी तरफ आ के तो देख । तेरा ध्यान न रखूं तो कहना ।
मेरी बातें लोगो से करके तो देख । तुझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना ।
मेरे चरित्रों का मनन करके तो देख । ज्ञान के मोती तुझमें न भर दूँ तो कहना ।
मुझे अपना मददगार बना के तो देख । तुम्हें सबकी गुलामी से न छुडा दूँ तो कहना ।
मेरे लिए आँसू बहा के तो देख । तेरे जीवन में आंनद के सागर न बहा दूँ तो कहना ।
मेरे लिए कुछ बन के तो देख । तुझे कीमती न बना दूँ तो कहना ।
मेरे मार्ग पर निकल कर तो देख । तुझे शान्तिदूत न बना दूँ तो कहना ।
स्वयं को न्यौछावर करके तो देख । तुझे मशहूर न कर दूँ तो कहना ।
मेरा कीर्तन करके तो देख । जगत का विस्मरण न करा दूँ तो कहना ।
तु मेरा बन के तो देख । हर एक को तेरा न बना दूँ तो कहना ।
श्री नीलकण्ठ महादेव जी का इतिहास । अमृत प्राप्ति के लिए दैत्यों और देवताओं ने समुदृमंथन के द्वारा उत्पन्न प्रसिद्ध कालकूट नामक विष को पीकर । मणिकूट पर्वत के मूल मे स्थित । भगवान श्री नीलकण्ठ जी है । जो भक्तों का कल्याण करने वाले हैं ।
श्री नीलकण्ठ महादेव जी के पहुचने का मार्ग निम्न है । ऋषिकेश तथा लक्ष्मण झूला के मध्य में गंगाजी के पूर्वी भाग में स्थित पर्वत का नाम मणिकूट है । इसी मणिकूट पर्वत के अग्निपार्श्व में स्वयंम्भू लिंग के रूप में श्री नीलकण्ठ महादेव जी विराजमान है ।
श्री नीलकण्ठ महादेव जी के मन्दिर जाने के लिये लक्ष्मण झूला के पास आपको बहुत गाडी मिलेगी । जिसके द्वारा आप बहुत ही कम समय में नीलकण्ठ पहुँच जाओगे ।
अगर आप पैदल जाना चाहते हो । तो स्वर्गाश्रम के उत्तरी पार्श्व से एक मार्ग जाता है । इस मार्ग से आगे जाने पर पर्वत की तलहटी से लगा हुआ समतल मार्ग चिल्लाह-कुन्हाव को जाता है । उसी मार्ग पर डेढ किलोमीटर चलने पर एक पहाडी झरना आता है । उस झरने को पार करते ही उस मार्ग को छोड़कर बायीं ओर मुड जाना पडता है । वहां पर तीर के निशान सहित श्री नीलकण्ठ महादेव जी के नाम का बोर्ड लगा हुआ है । तीर के निशान द्वारा उसी दिशा की ओर आगे बढकर श्री नीलकण्ठ महादेव जी का वास्तविक मार्ग आरम्भ होता है ।
इस मार्ग पर डेढ किलोमीटर आगे चलने पर नीचे की ओर स्वर्गाश्रम । लक्ष्मण झूला एवं गंगाजी का दृश्य बहुत सुन्दर दिखाई देता है । लगभग दो किलोमीटर आगे चलने पर पानी का एक छोटा सा तालाब आता है । इसमें पहाडी से पानी हर समय बूंद बूंद निकलता रहता है । इसमे बारहों महीने पानी रहता है । इसको बीच का पानी कहते है ।
यह पानी स्वर्गाश्रम तथा श्री नीलकण्ठ महादेव जी के मध्य में माना जाता है । यहाँ से दो किलोमीटर आगे चलने पर पानी की टंकी आती है । यहॉ पर चाय की दुकान रहती है । यहां थोडा विश्राम कर लेना चाहिये । अब चढ़ाई समाप्त हो गई है । यहां से लगभग 200 मीटर की दूरी चलने पर पर्वतों के शिखरो के परस्पर मिलने से बने हुए एक छोटे से मैदान में पहुंच जाते हैं ।
यहां खडे होने पर बांई ओर मणिकूट पर्वत । दाहिनी ओर विष्णुकूट पर्वत और सम्मुख बृह्मकूट पर्वत के शिखर पर श्री भुवनेश्वरी पीठ एवं तीनों पर्वतों के संधिमूल में श्री नीलकण्ठ महादेव जी दिखाई देते है ।
गंगाजी के प्रवाह से मणिकूट पर्वत की उंचाई 4500 फिट है । मणिकूट पर्वत से लगभग 1500 फिट नीचाई पर श्री नीलकण्ठ महादेव जी का मन्दिर है ।
साभार श्री मयंक भारद्वाज के कम्प्यूटर दुनियाँ ब्लाग से ।
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