रविवार, अप्रैल 01, 2012

कामवासना 10

- सोचो तुम दोनों । वह जैसे उन्हें जीवन के रहस्य सूत्र बहुत प्यार से समझाती हुयी सी बोली - एक हिसाब से यह कहानी बङी उलझी हुयी सी है । और दूसरे नजरिये से पूरी तरह सुलझी हुयी भी । शायद तुम चौंको । इस बात पर । पर मेरे इस अप्रतिम अदभुत सौन्दर्य और इस ठहरे हुये से उन्मुक्त यौवन का कारण राज सिर्फ़ मेरा प्रेमी ही तो है । न तुम । न तुम । न खुद मैं । न मेरा पति । न भगवान । न कोई और । सिर्फ़ मेरा प्रेमी ।
वो दोनों वाकई ही चौंक गये । बल्कि बुरी तरह चौंक गये ।
- हाँ जी हाँ । वह अपने चेहरे से लट को पीछे करती हुयी बोली - सोचो । एक सुन्दर युवा लङकी एक लङके से प्यार करती है । लेकिन उसका ये प्यार पूरा नहीं होता । और वो इस प्यार को करना छोङ भी नहीं पाती । नितिन यही बहुत बङा रहस्यमय सच है । चाहे लाखों जन्म क्यों न हो जाये । वह जब तक उस प्यार को पा न लेगी । तब तक वह प्रेमी उसके दिल से न निकलेगा । वह दिन रात उसी की आग में जलती रहेगी । प्रेम अगन । कौन जलती रहेगी ? एक टीन एज यंग गर्ल । ध्यान से समझने की कोशिश करो । प्यार के अतृप्त अरमानों में निरन्तर सुलगती । वो हसीन लङकी । वो प्रेमिका । उसके अन्दर कभी न मरेगी । चाहे जन्म दर जन्म होते जायें । कौन नहीं मरेगी ? वो हसीन लङकी । वो प्रेमिका । जिसके अन्दर 15-16 की उमर से एक अतृप्त प्यास पैदा हो गयी ।
इसीलिये वो हसीन लङकी । वो प्रेमिका । मेरे अन्दर सदा जीवित रहती है । और वही मेरी मोहक सुन्दरता और 


सदा यौवन का राज है ना । अब दूसरी बात सोचो । उस लङकी पदमा की शादी हो जाती है । और किसी हद तक उसकी काम वासना और अन्य शरीर वासनायें तृप्त होने लगती है । लेकिन उसकी खुद की मचलती प्यार प्रेम वासना तृप्त नही होती । जो चाह उसके दिल में प्रेमी और अपने प्रेम के लिये सुलग चुकी है । वो प्रेमी की बाहों में झूलना । वो चुम्बन । वो आलिंगन । वो चिढाना । सताना । रूठना । मनाना । वो उसके सीने पर सर रखना । ये सब एक प्रेमिका को । उसकी किसी से शादी हो जाना । नहीं दे सकते । कभी नहीं । तब ये तय है । उसके अन्दर एक प्रेमिका सदा मचलती ही रहेगी । प्रेमिका । जिसे सिर्फ़ अपने प्रेमी की ही तलाश है । इसीलिये तो मैं कहती हूँ - कमाल की कहानी लिखी है । इस कहानी के लेखक ने ।.. कहानी जो उसने शुरू की । उसे कैसे कोई और खत्म कर सकता है ? कहानी । वह मादकता से होठ काटती हुयी सी बोली - कहानी जो सदियों तक खत्म न हो । बोलो लिख सकोगे । तुम इस कहानी का अन्त । अन्त ? पर अभी तो इसका मध्य ही नहीं हुआ ।
नितिन को लगा । जैसे वह पागल ही हो जायेगा । पर मनोज इस तरह शान्ति से उसकी बात सुन रहा था । जैसे महत्वपूर्ण गूढ धार्मिक प्रवचन सुन रहा हो । उसने सोचा । कम से कम उसने तो अपनी जिन्दगी में ऐसी कोई औरत न देखी थी । कहीं ऐसा तो नहीं कि वह एक सामान्य औरत हो ही नहीं ? फ़िर कौन हो सकती है वह ?
कल उसने एक बङा अजीव सा निर्णय आखिर लिया था । वह अच्छी तरह जान गया था । वह चाहे । सालों लगा रहे । इस बेहद रहस्यमय फ़ैमिली की इस देवर भाभी रहस्य कथा या फ़िर देवर भाभी प्रेत रहस्य कथा को किसी तरह नहीं जान पायेगा । तब उसने कुछ अजीव सा अलग हटकर सोचा । और उन्हीं के घर में कमरा लेकर बतौर किरायेदार रहने लगा । और अभी वे सब छत पर बैठे थे । उसे ये भी बङा रहस्य लगा कि उन दोनों ने उसके बारे में

जानने की कोई कोशिश नहीं की । वह कहाँ रहता है ? उसके परिवार में कौन है ? उसने कहा । वह स्टूडेंट है । और उनके यहाँ रहना चाहता है । और वे मान गये । वह कुछ किताबें कपङे और स्कूटर के साथ वहाँ आ गया । अन्य छोटे मोटे सामान उन देवर भाभी ने उसे घर से ही दे दिये थे ।
गौर से देखा जाये । तो हर आदमी की जिन्दगी सिर्फ़ एक प्रश्नात्मक जिज्ञासा से बना फ़ल मात्र है । आगे क्या ? ये क्या ? वो क्या ? ये अच्छा । ये बुरा । जैसे प्रश्न उत्तरों में उलझता हुआ वह जन्म दर जन्म यात्रा करता ही जाता है । और कभी ये नहीं सोच पाता कि - हर प्रश्न वह स्वयं ही पैदा कर रहा है । और फ़िर स्वयं ही हल कर रहा है । उसका स्वयं ही उत्तर भी दे रहा है । बस उसे ये भृम हो जाता है कि प्रश्न उसका है । और उत्तर किसी और का । प्रश्न उत्तर । शायद बस इसी का नाम जीवन है ।
प्रश्न उत्तर । सिर्फ़ उसकी एक जिज्ञासा आज उसे इस घर में ले आयी थी । यकायक एक बङी सोच बन गयी थी उसकी । अगर वह ये प्रश्न हल कर सका । तो शायद जिन्दगी के प्रश्न को ही हल कर लेगा । बात देखने में छोटी सी लग रही थी । पर बात उसकी नजर में बहुत बढी थी । इसका हल हो जाना । उसकी आगे की जिन्दगी को सरल पढाई में बदल सकता है । जिसके हर इम्तहान में फ़िर वह अतिरिक्त योग्यता के साथ पास होने वाला था । और यही तो सब चाहते हैं । फ़िर उसने क्या गलत किया था ?
अब बस उसकी सोच इतनी ही थी कि अब तक जो वह मनोज के मुँह से सुनता रहा था । उसका चश्मदीद गवाह वह खुद होगा । आखिर इस घर में क्या खेल चल रहा है ?
रात के आठ बज चुके थे । मनोज कहीं बाहर निकल गया था । पर वह कुछ घुटन सी महसूस करता खुली छत पर आ गया था । पदमा नीचे काम में व्यस्त थी । अपने घर में एक नये अपरिचित युवक में स्वाभाविक दिलचस्पी लेते हुये अनुराग भी ऊपर चला आया । और उसी के पास कुर्सी पर बैठ गया ।
- मनोज जी से मेरी मुलाकात । वह उसकी जिज्ञासा का साफ़ साफ़ उत्तर देता हुआ बोला - नदी के पास शमशान में हुयी थी । जहाँ मैं नदी के पुल पर अक्सर घूमने चला जाता हूँ । मनोज को शमशान में खङे बूढे पीपल के नीचे एक दीपक जलाते देखकर मेरी जिज्ञासा बनी । ये क्या है ? यानी इस दीपक को जलाने का क्या मतलब है ?


लेकिन उसने अपनी तंत्र मंत्र दिलचस्पी आदि के बारे में कुछ न बताया ।
- ओह ओह । अनुराग जैसे सब कुछ समझ गया - कुछ नहीं जी । कुछ नहीं । नितिन जी । आप पढे लिखे इंसान हो । ये सब फ़ालतू की बातें हैं । कुछ नहीं होता इनसे । पहली बात । भूत प्रेत जैसा कूछ होता है । मैं नहीं मानता । और यदि होता भी है । तो वो इन दीपक वीपक से भला कैसे खत्म हो जायेगा ?
फ़िर आप सोच रहे होंगे । हमारी कथनी और करनी में विरोधाभास क्यों ? क्योंकि दीपक तो मेरा भाई मनोज ही जलाने जाता है । बात ये है कि लगभग चार साल पहले ही पदमा से मेरी शादी हुयी है । और लगभग उसी समय ये बना बनाया घर मैंने खरीदा था । और हम किराये के मकान से अपने घर में रहने लगे थे । सब कुछ ठीक चल रहा था । और अभी भी ठीक ही है । पर कभी कभी । अण्डरस्टेंड । कभी कभी मेरी वाइफ़ कुछ अजीव सी हो जाती है । एज हिस्टीरिया पेशेंट । यू नो । हिस्टीरिया ?
वह सेक्स के समय । या फ़िर किसी काम को करते करते । या सोते सोते ही । अचानक अजीव सा व्यवहार करने लगती है । जैसे उसका चेहरा विकृत हो जाना । उसकी आवाज बदल जाना । आँखों में भयानक बिल्लौरी इफ़ेक्ट सा पैदा हो जाना । कुछ अजीव शव्द वाक्य बोलना । जैसे लक्षण कुछ देर को नजर आते हैं । फ़िर कुछ देर बाद वह अपने आप सामान्य हो जाती है ।
बताईये इसमें क्या अजीव बात है ? आज दुनियाँ में एडस जैसी हजारों खतरनाक जान ही लेवा बीमारियाँ कितनों को हैं ? आदमी व्याग्रा से सेक्स जर्नी ड्राइव करता है । पाचन टेबलेट से खाना पचाता है । नींद गोलियाँ खाकर सोता है ...हो हो हो..है ना हँसने की बात ।
ब्रदर आज साइंस ने बेहद तरक्की की है । हर रोग का इलाज हमारे पास है । फ़िर इसका भी है । डाक्टर ने पता नहीं क्या अब्नार्मल ब्रेन आर्डर डिस प्लेमेंटरी जैसा कुछ ..हो हो हो...अजीव सा नाम लिख कर पर्चा बना दिया । उसकी मेडीसंस वह खाती है । अभी मुझे देखो । वैसे चीनी..कितनी महंगी है । और आदमी के अन्दर शुगर बढी हुयी है हो ..हो..हो.. है ना हँसने की बात । मेरी खुद बढी हुयी है । अभी चैक अप कराऊँ । डाक्टर पचासों रोग और भी निकाल देंगे ।.. हो..हो..हो.. आप यंग हो । स्वस्थ लगते हो । बट बिलीव मी मि. । माडर्न मेडिकल साइंस आप में भी हजार कमी बता देगी ..हो..हो..हो..है ना हँसने की बात ।
- है ना हँसने की बात । पूरा अजायब घर । उसके नीचे जाने के बाद उसने सोचा - साले इंसान है । या किसी कार्टून 


फ़िल्म के करेक्टर । इनका कोई एंगल ही समझ नहीं आता । एक तो वो दो ही नहीं झेले जा रहे थे । ये तीसरा और आ गया । ये तो ऐसा लगता है । वह उनकी हेल्प के उद्देश्य से नहीं आया । वे उल्टा उस पर ऐहसान कर रहे हों । कमाल की कहानी लिखी है । इस कहानी के लेखक ने । उसके कानों में पदमा जैसे फ़िर बोली - राजीव ।.. कहानी जो उसने शुरू की । उसे कैसे कोई और खत्म कर सकता है । ये कहानी है..? कहानी । कहानी उससे छोङी भी न जा रही थी । और पढना भी मुश्किल लग रहा था ।
एक बार तो उसे लगा । कहाँ वह फ़ालतू के झमेले में फ़ँस गया । भाङ में गयी कहानी । और उसका लिखने वाला । पर तभी उसे चुनौती सी देती आकर्षक पदमा नजर आती । और कहती - इस कहानी के तारतम्य को आगे बढाना । उसके  सूत्र जोङना । तुम जैसे बच्चों का खेल नहीं ।.. सोचो । अगर वो ऐसा न करते । तो फ़िर इतनी दिलचस्प कहानी बन सकती थी ? क्या कमाल की कहानी लिखी उन्होंने ।
और तभी उसे मनसा का भी चैलेंज सा गूँजता - भाग जा बच्चे । ये साधना सिद्धि तन्त्र मन्त्र बच्चों के खेल नहीं ।

इनमें दिन रात ऐसे ही झमेले हैं । इसलिये अभी भी समय है । दरअसल ये वो मार्ग है । जिस पर जाना तो आसान है । पर लौटने का कोई विकल्प ही नहीं है ।
हद हो गयी । जैसे उल्टा । जासूस किसी रहस्य को खोजने चला । और खुद रहस्य में फ़ँस गया । लेखक कहानी लिखने चला । और खुद कहानी हो गया । वह तो अपने मन में हीरोगीरी जैसा ख्याल करते हुये इसका एक एक तार जोङकर शान से इस उलझी गुत्थी को हल करने वाला था । और उसे लगता था । सब चकित से होकर उसको पूरा पूरा सहयोग करेंगे । पर यहाँ वह उल्टा जैसे भूल भुलैया में फ़ँस गया था । कहावत ही उलट गयी । खरबूजा छुरी पर गिरे । या छुरी खरबूजे पर । कटेगा खरबूजा ही । लेकिन यहाँ तो खरबूजा ही छुरी को काटने पर जैसे आमादा था ।
उसने मोबायल में समय देखा । रात के दस बजना चाहते थे । नीचे घर में शान्ति थी । पर हल्की हल्की टी वी चलने की आवाज आ रही थी । कुछ सोचता हुआ वह नीचे उतर आया ।

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