रविवार, अप्रैल 01, 2012

कामवासना 16

और ये कहानी बस यही तो है । और ये कहानी बस यही तो है । और ये कहानी बस यही तो है । रह रह कर उसके दिमाग में यह वाक्य रहस्यमय अन्दाज में गूँजने लगा । कहीं ऐसा तो नहीं कि - कोई कहानी ही न हो । पर वह ऐसा कह भी कैसे सकता था । कहानी थी । न सिर्फ़ कहानी थी । बल्कि अब वह भी इसी कमाल की कहानी का पात्र बन गया था । कहानी पढने चला इंसान खुद कहानी का हिस्सा बन गया । पात्र बन गया । कहानी के शब्द मानों चैलेंज कर रहे थे । रहस्य खोजने की जरूरत नहीं । रहस्य कहानी के लिखे इन्हीं शब्दों में है । खोज सको तो खोज लो ।
तब उसने सख्ती से एक निश्चय किया । अब और कुछ भी हो । इस मायावी औरत के जाल में हरगिज नहीं फ़ँसेगा । और कहानी से अलग रहकर सावधानी सतर्कता से कहानी पढेगा । दूसरे उसने अभी तक जो अपने तंत्र ज्ञान का कोई उपयोग नहीं किया । उसका उपयोग करेगा । और वशीकरण जैसे उपायों का सहारा भी लेगा । इस चालाक नागिन का वशीकरण । हाँ हाँ वशीकरण । क्योंकि इसने ऐसा करने को उसे मजबूर कर दिया है ।
- नितिन जी । अचानक वह हाथ बढाकर फ़ूलों की क्यारी से एक फ़ूल पत्तों युक्त नाजुक टहनी तोङकर अपने नाजुक गालों पर फ़िराती हुयी बोली - मैंने एक बङा मजेदार कार्टून देखा था । कार्टून । उसने सीधे सीधे उसकी आँखों में देखा - यू नो कार्टून ?..कार्टून में एक पात्र को अपनी बीमार भैंस को दवा खिलानी थी । किसी ने उसे सुझाव दिया । एक खोखली नली में दबा रख कर भैंस के मुँह में डालकर फ़ूँक मार दो । बस काम खत्म । सुझाव एकदम फ़ेंटास्टिक था । उसने ऐसा ही किया । लेकिन..लेकिन.. । अचानक वह आगे बोलने से पहले ही जोर से खिलखिलाकर हँसने लगी । और हँसते हँसते हुये ही बोली - लेकिन जानते हो नितिन जी क्या हुआ ? वह आदमी फ़ूँक मारता । इससे पहले भैंस ने ही उल्टा फ़ूंक मार दी । और पूरी दबा उस आदमी के पेट में । ह..ह..ह । नितिन जी भैंस ने ही उल्टा फ़ूंक मार दी ।
क्या है ये ? वह अचानक अन्दर तक सहम गया । कोई जादूगरनी ? वह मधुर स्वर में दंतपंक्ति को बिजली सा

चमकाती हुयी बङे आकर्षक अन्दाज में हँसे जा रही थी । सीधी सी बात थी । जो बात अभी अभी बस उसने सोच ही पायी थी । उसका उसने भरपूर मजाक बनाया था । और एक बार फ़िर से उसे चैलेंज किया था । और वह सिर्फ़ उसे देख पा रहा था । उसे । जो अब ऊपर के होठ से निचला होठ दबाकर गर्दन के नीचे सीने पर फ़ूंक मार रही थी ।
- चलिये । अचानक वह फ़िर से उसे देखती हुयी बोली - जोक्स की बात छिङ ही गयी । तो एक और जोक सुनो । अरे सुन लो भाई । शायद ऐसी कहानी फ़िर कभी न लिखी जाये ? शायद ।..एक आदमी अपनी बेहद सुन्दर चंचल दिलफ़ेंक और मनचली बीबी से बहुत परेशान था । वह हर तरह से उसके आउट आफ़ कंट्रोल थी । तब किसी के सुझाव पर वह उसको वश में रखने हेतु एक पहुंचे हुये वशीकरण साधु के पास गया । और प्रार्थना की कि - वह कुछ ऐसा उपाय कर दे । जिससे उसकी स्त्री उसके वश में हो जाये । उसकी बात सुनकर साधु के चेहरे पर पहले बङे दुखी भाव आये । जैसे उसका ही घाव हरा हो गया हो । फ़िर अचानक उसको बहुत क्रोध आया । उसने उस आदमी को एक चाँटा मारा । और बोला - मूर्ख ! यदि औरत का वशीकरण करने का कोई उपाय होता । तो फ़िर तमाम लोग साधु ही क्यों बनते ?
फ़िर ये परवाह किये बिना कि नितिन पर उसके जोक का क्या असर हुआ । वह फ़िर से हँसती हुयी लोटपोट सी होने लगी । और वह ऐसे आकर्षक अन्दाज में हँस रही थी कि हँसने से कम्पित हुआ उसका आंचल रहित वक्ष एक शक्तिशाली चुम्बक की तरह उसे फ़िर से खींचने लगा ।
- अरे फ़िर क्यों पढे जा रहे हो ? ये घटिया वल्गर चीप अश्लील पोर्न सेक्सी कामुक सस्ती सी वाहियात कहानी । वह जैसे सीधे उसकी आँखों में झांकते हुये मौन स्वर में बोली - यही शब्द देते हो ना तुम । ऐसे वर्णन को । पाखण्डी 


युवक । तुम भी तो उसी समाज का हिस्सा हो । जहाँ इसे घटिया अनैतिक वर्जित प्रतिबंधित हेय मानते हैं । फ़िर क्यों रस आ रहा है । तुम्हें इस कहानी में ?..गौर से सोचो । तुम उसी ईडियट सोसाइटी का अटूट हिस्सा हो । उसी मूर्ख दोगले समाज का अंग हो । जहाँ दिमाग में तो यही सब भरा है । हर छोटे बङे सभी की चाहत यही है । पर बातें कपट युक्त उच्च सिद्धांतों खोखले आदर्श और झूठी नैतिकता की है ।
भाङ में गयी कहानी । और भाङ में गया रहस्य । वह तो पागल सा हुआ जा रहा है । वह अपना सब ज्ञान भूल गया । स्वभाव भूल गया । दिनचर्या भूल गया । उसका जैसे अस्तित्व ही खत्म कर दिया । इस मायावी औरत ने । ये एकदम उस पर छा सी जाती है । उसे सोचने का कोई मौका तक नहीं देती । उसने घङी पर निगाह डाली । सवा तीन बजने वाले थे । वह फ़ौरन ही इस भूलभुलैया से जाने की सोचने लगा । और उठने को तैयार हो गया ।
- सेक्स ..सेक्स..सिर्फ़ सेक्स । वह बङे आकर्षक ढंग से एक घुटना मोढ कर दूसरे पर रखती हुयी अपने उसी विशेष धीमें थरथराते अन्दाज में बोली - काम.. । नितिन जी ! काम. आप देखो । तो पूरे विश्व के लोग सेक्स के दीवाने होते हैं । लेकिन रियल्टी में वे रियल सेक्स को जानते तक नहीं । सेक्स बिजली है । पावर । ऊर्जा । लेकिन क्या सच में लोग बिजली को भी ठीक से जानते हैं ? वह बिजली । जिसका जाने कितना । और जाने कब से । यूज कर रहे हैं । पर क्या जानते हैं उसे ? मैं कहती हूँ - नो । हंड्रेड परसेंट नो । यस..नो नितिन जी.. नो । देखो । बिजली में दो तार होते हैं । जिसको - अर्थ फ़ेस । निगेटिव पाजिटिव । ठंडा गर्म । ऋणात्मक धनात्मक नाम से जाना जाता है । ये दोनों तार इस अदभुत अदृश्य ऊर्जा के उपयोग के लिये बहुत आवश्यक होते हैं ना । जिस यन्त्र में लगकर ये दोनों तार जुङ जाते हैं । joint । तुम समझ रहे हो ना । संभोग । तब वह यन्त्र ऊर्जावान हो जाता है । जीवन्त । जीवन ऊर्जा से भरपूर । पर है ना कमाल । एक दूसरे के अति पूरक ये तार आपस में कभी नहीं मिलते । लेकिन जब भी । गलती से भी । ये आपस में मिलते हैं । तो पैदा होती है । एक अदभुत ऊर्जा । प्रत्यक्ष होती है । एक अदृश्य ऊर्जा । चिटऽऽ चिटऽऽ फ़टाऽऽक । तुमने कभी देखा । कैसी अदभुत दिव्य चमक होती है तब । पर कब ? जब दो नंगे तार आपस में लिपट जाये । दो नंगे तार । दो  नंगे बदन । दो नंगे शरीर । एक पाजिटिब । एक निगेटिव । और यही है असली सेक्स । उसका असली रूप । जब स्त्री पुरुष सिर्फ़ कपङों से ही नहीं । आंतरिक रूप से भी नंगे होकर एक दूसरे से लिपटे जायं । उनकी समस्त भावनायें नंगी हो जायं । आपस में । एक दूसरे से । कोई छिपाव नहीं । कोई दुराव नहीं  । सेक्स .. सेक्स ..सिर्फ़ सेक्स । जिसमें आनन्द ही आनन्द की चिंगारियाँ उठने लगे ।
- आऽऽह ! वह अचानक तङपते से बैचेन स्वर में बोली - मैं प्यासी हूँ ।
यकायक ही वह बेहद व्याकुल सी दिखने लगी । उसकी बङी बङी आँखें अपने गोलक में तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी । उसकी सुन्दर लटें चेहरे पर झूल आयी थी । वह जैसे असमंजस में प्यासी निगाहों से उसे देखती । फ़िर तेज तेज सांसे लेने लगती । हर सांस के साथ उसका सीना तेजी से ऊपर नीचे हो रहा था ।
नितिन ने कठिनाई से अपने को संयमित किया ।
पर वह जैसे नियन्त्रण से बाहर हो रही थी । उसने काम ताप की तपन से व्याकुल होकर ब्लाउज खोल दिया । और

आँखें बन्द कर गहरी गहरी सांसे लेने लगी । उसके मुँह से बार बार ..नितिन जी..नितिन जी के धीमे शब्द निकल रहे थे । अब क्या करता वह ? उसके खुले उन्नत पुष्ट दूधिया उरोज उसके सामने थे । उसका अब और भी काम आच्छादित हो चुका अकल्पनीय सौन्दर्य उसे शून्यता 0 में खींच रहा था । और वह लगभग शून्य 0 ही हो चला था ।
उसके दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया । वह आदेशित यन्त्र सा उठा । और पदमा की कुर्सी के पास ही नीचे जमीन पर बैठ गया । उसने उसकी गोरी कलाई थामी । और प्यार से उसकी हथेली सहलाता हुआ बोला - पदमा जी । प्लीज । प्लीज । आप होश में आईये ।
उसका वही हाथ उठा कर पदमा ने अपने विशाल स्तनों से सटा कर दबा लिया । और फ़िर जैसे दूर गहरी घाटी से उसकी आवाज आयी - भूल जाओ कि तुम क्या हो । भूल जाओ कि मैं क्या हूँ । जो होता है..।
नितिन उसके स्तन सहलाने लगा । मसलने लगा । वह वाकई भूल गया । वह कब नीचे उतर कर उसकी गोद में

आ गयी । उसे बोध ही न हुआ । वह उसे गिराकर उसके ऊपर आ गयी थी । उसके दोनों सुडौल स्तन उसके चेहरे को छू रहे थे । वह किसी मजबूत से पेङ से अमरबेल की तरह लिपटी हुयी थी । उसे किसी जहरीली नागिन के बदन से लिपटे होने का स्पष्ट अहसास हो रहा था । उसके जहर से वह नशे से मूर्छित सा हो रहा था । फ़िर वह उसका मनमाना उपयोग करने लगी । काम बासना का अनोखा खेल खेलते हुये ।
कामवासना । पर क्या वाकई वह काम वासना से प्रभावित हो रहा था ? उसने जान बूझ कर खुद को निष्क्रिय कर रखा था । और बेहद गौर से उसकी हर गतिविधि और शरीर में होते परिवर्तन देख रहा था । खास कर उसके चेहरे पर आते परिवर्तनों का वह बेहद सूक्ष्मता से निरीक्षण कर रहा था ।
- नितिन । उसके दिमाग में भूतकाल का मनसा जोगी बोला - इसको समझना बहुत कठिन भी नहीं है । तुम एक कप गर्म चाय या फ़िर एक गिलास ठंडा पानी धीरे धीरे पीने के समान व्यवहार से किसी प्रेत आवेश को सुगमता से जान सकते हो । जिस प्रकार चाय के कप से घूँट घूँट भरते हुये तुम्हारे शरीर में गर्माहट का समावेश धीरे धीरे ही होता है । और पूरा कप चाय पी लेने के बाद तुम एक ऊर्जा और भरपूर गर्माहट अपने अन्दर पाते हो । इसी तरह इस तरह का कोई भी प्रेत आवेश भी धीरे धीरे क्रियान्वित होता है ।
उदाहरण के लिये ऐसे प्रेत आवेश में जबकि वह शुरू भी होने लगा हो । तुम्हें लग सकता है कि वह सामान्य से 


थोङा ही अलग हट कर व्यवहार कर रही हो । जैसे किसी विशेष किस्म की आदत की वजह से । फ़िर अगर वह आवेश वहीं रुक जाये । उससे आगे न बढे । तो एक आम आदमी यही सोचेगा कि ये इंसान थोङा चिङचिङा गया । क्रोध में है । कुछ परेशान सा है आदि बहुत से सामान्य से थोङा अलग लक्षण । लेकिन यदि उस आवेश को प्रोत्साहित करते हुये उसका दर बङाते चले जाओ । तब वे असामान्य लक्षण तुम्हें स्पष्ट महसूस होंगे । साफ़ साफ़ दिखाई देंगे ।
और तब उसने पदमा के चेहरे को गौर से देखा । और रहस्यमय अन्दाज में मुस्कराया । पहली बार उसे लगा । काश ये अभी कहती -  क्या कमाल की कहानी लिखी । इस कहानी के लेखक ने । कहानी जो उसने शुरू की । उसे कोई और कैसे खत्म कर सकता है । इसीलिये..इसीलिये ये कहानी न तुमसे पढते बन रही है । न छोङते । ये बच्चों का खेल नहीं नितिन ।
लेकिन अभी वह कुछ कैसे कहती । अभी तो वह खुद कहानी लिख रही थी । शायद एक बेहद रहस्यमय कहानी ।

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