शनिवार, फ़रवरी 08, 2014

पिशाच का बदला 1

16 june 2007    63 वर्षीय साहिब सिंह वर्मा मजबूत कद काठी वाले धनाडय व्यक्ति थे । 42 सदस्यों वाले साहिब सिंह का संयुक्त परिवार और उनका अमीरी रहन सहन पुराने जमाने के किसी जमीदार की याद दिलाता था ।
साहिब सिंह खुद लेखपाल पद पर सरकारी नौकरी कर चुके थे । और उनके आठ पुत्र भगवान की कृपा से पुलिस । इनकम टेक्स । इंजीनियर जैसे पदों पर नौकरियां कर रहे थे । कुल मिलाकर पैसा उनके यहां आता नहीं था । बल्कि बरसता था । नौकरी के अलावा खेती । ट्रेक्टर और ट्रकों से उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती थी ।
साहिब सिंह से मेरी मुलाकात । मानसी विला । पर कुछ ही देर पहले शाम तीन बजे हुयी थी । पांच हजार वर्ग मीटर जगह में बना मानसी विला चार मंजिला महल के जैसा था । जिसके ऊपर की तीन मंजिले आफ़िस के उद्देश्य से किराये पर उठी हुयी थी ।
और ग्राउंड फ़्लोर पर दो हजार वर्ग मीटर में बना सेपरेट पोर्शन नीलेश दी ग्रेट के निजी प्रयोग के लिये था । शेष तीन हजार वर्ग मीटर की भूमि आफ़िसों के वाहन आदि के उद्देश्य से बनी थी ।
 नीलेश मेरा मित्र और एक अच्छा साधक था । मानसी उसकी प्रेमिका का नाम था । मानसी विला में नीलेश के परिवार का कोई भी सदस्य नहीं रहता था । उसकी देखभाल के लिये महादेव और ऊषा नामक दम्पत्ति नियुक्त थे । जो आसाम के रहने वाले थे ।
मानसी विला की उपरली तीन मंजिलो से ढाई लाख रुपया मंथली किराया आता था । जो नीलेश दी ग्रेट की पाकेट मनी के काम आता था । इस सबके बाबजूद मानसी विला पर मेरा या नीलेश का मिलना ईद के चांद जैसा ही था ।

इसलिये साहिब सिंह को एक इत्तफ़ाक के तौर पर जब मैं मिल गया । तो उन्हें बडी राहत महसूस हुयी ।
शुक्र है । शुक्र है कि आप मिल गये । वह बेहद खुशी से बोले । आप ही प्रसून जी हैं न ? लगातार छह दिनों से आपको कितने स्थानों पर तलाश किया तब जाकर आज आपके दर्शन हुये । आपका मोबायल फ़ोन भी स्विच आफ़ बता रहा था । खैर । मेरा नाम साहिब सिंह वर्मा है । और मैं रिटायर्ड लेखपाल हूं । आपके बारे में मुझे यादव ट्रांसपोर्ट के मालिक वीरी सिंह यादव ने बताया था । वीरी सिंह मेरा मित्र है ।
जी..कहिये । वर्मा जी । मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं ?
दरअसल..वह संकोच से बोला । मुझे पहले से मालूम है । जैसा कि वीरी ने मुझे बताया । आप आमतौर पर गुनिया ओझाओं जैसा झाडफ़ूंक करने का । प्रेतबाधा हटाने का कार्य नहीं करते हैं । और स्वाभाविक ही ऐसे पीडित से कह देते हैं । कि मैं वो प्रसून नहीं हूं ? आपको मेरे बारे में कोई गलतफ़हमी हुयी है ? या किसी ने आपको मेरे बारे में गलत बताया है ? एम आय राइट..प्रसून ?
जो बात अगले पलों में मैं कहने वाला था । उसे वर्मा जी के मुंह से सुनकर मैं सिर्फ़ मुस्कराकर रह गया ।
देखिये..प्रसून जी । वर्मा जी बेहद विनम्रता से बोले । मैं सीधा सीधा आपके पास दौडा नहीं चला आया । बल्कि अस्सी अलग अलग जगह गुनिया ओझा मजार मंदिरों में भटककर तब आपके पास आया हूं ।
जब मुझे लगा कि मेरी पुत्रवधू रेशमा को इस अनजानी मुसीबत से शायद आप ही छुटकारा दिला सकते हैं ..?
वर्मा जी बेहद दिलचस्पी से अपनी मुसीबत की कहानी सुना रहे थे । और मैं गौर से उनके साथ आये ढाई साल के बच्चे डब्बू को देख रहा था । वास्तव में मुझे वर्मा जी के मुंह से निकले शब्द कभी कभी ही सुनायी दे रहे थे ।
मेरा दिमाग डब्बू के दिमाग से कनेक्ट था । और मैं फ़ालतू की हां हूं कर रहा था ।
revenant..revenge..and very interesting .। कुछ देर की कनेक्टिविटी के बाद स्वतः ही मेरे मुंह से निकला । reborn case as nandoo @ dabboo ।
what..? वर्मा जी हक्का बका होकर बोले । ये आप क्या कह रहे हैं । प्रसून जी ?
मैंने रिस्टवाच पर निगाह डाली । शाम के पांच बज चुके थे । और वर्मा जी इस शहर से 75 किलोमीटर दूर खेडा रामपुर के नजदीक एक गांव से आये थे । उनके पास सफ़ारी गाडी होने के बाबजूद एक सवा घन्टे का सफ़र आराम से था । और मुझे रास्ते में कुछ और भी समय लग सकता था ।
इसलिये मैं तुरन्त उठ खडा हुआ । और एक छुपी निगाह डब्बू पर डालता हुआ बोला । चलिये वर्मा जी । आज का डिनर आपके यहां ही करते हैं । भूतों के साथ । साहिब सिंह की खुशी का ठिकाना न रहा ।
साहिब सिंह वर्मा लोधे राजपूत थे । रेशमा उनकी छठवें नम्बर की पुत्रवधू थी । डब्बू चौथे नम्बर की पुत्रवधू पुष्पा का बच्चा था । रेशमा को चार महीने पूर्व प्रसव से एक लडका हुआ था । पिछले ढाई महीने से रेशमा की आदतों में जबरदस्त बदलाव आया था । जिनको देखकर कोई पागल भी बता सकता था । कि वह भयंकर प्रेतबाधा से ग्रस्त थी ।
लिहाजा वो जगह जगह । जहां जो बताता उसका इलाज कराने लगे । पर कोई सफ़लता नहीं मिली । हालांकि उन्होंने ये पूरी राम कहानी मुझे विस्तार से सुनाई थी । पर मैंने उसको ठीक से नहीं सुना था । मैं उस समय डब्बू को रीड कर रहा था ।
मेरी इस माइंड रीडिंग का रिजल्ट उस वक्त तक एक छोटा और दो बडे प्रेतों की पुष्टि कर चुके थे । साहिब सिंह वर्मा नाम का ये इंसान प्रेतों के मायाजाल में बुरी तरह फ़ंसा हुआ था । जिसके बेहद ठोस कारण थे ? और जिनके वारे में कोई सही निर्णय मैं घटनास्थल पर पहुंचकर ही ले सकता था ।
खेडा रामपुर से आठ किलोमीटर पहले ही शालिमपुर विलेज के पास मैंने वर्मा जी के ड्रायवर को गाडी रोकने का आदेश दिया । साहिब सिंह ने बेहद हैरत से मेरी तरफ़ देखा ।
मैंने खिडकी खोलकर डब्बू को कार से नीचे उतार दिया । और चारों तरफ़ निगाह घुमाते हुये लापरवाही से एक सिगरेट सुलगायी । डब्बू भागकर सामने स्थित फ़ार्म हाउस के खन्डित मन्दिर की ओर चला गया था ।
प्रसून जी । मुझे वर्मा जी की आवाज सुनाई दी । मुझे बेहद हैरत हो रही है । ये फ़ार्म हाउस मेरा ही है । लेकिन अभी तक की वार्ता में मैंने इस फ़ार्म हाउस का जिक्र तक नहीं किया । और आपने ठीक यहां पर गाडी रुकवायी । इसका क्या मतलब हुआ ?
वर्मा जी । मैंने सयंत स्वर में जबाब दिया । हर बात का कोई मतलब हो । ये आवश्यक नहीं होता । हर बात का मतलब बताया जाय । ये मुमकिन नहीं होता ?
फ़िर मेरे उत्तर का वर्मा जी पर क्या प्रभाव पडा । इससे बेफ़िक्र मैं थोडी ही दूर पर बहती हुयी नदी को देखने लगा । दरअसल वर्मा जी जिस बात की शुरूआत महज ढाई महीने पुरानी मान रहे थे । उसका बीज आज से पांच साल पहले इसी नदी के किनारे पडा था । मैंने एक निगाह इधर उधर भागते हुये डब्बू पर डाली और मेरे मुंह से निकला । नन्दू । नन्दू उर्फ़ नन्दलाल गौतम ?
अब हम लोग चलते चलते बिलकुल नदी के किनारे आ गये थे । मेरी उंगलियों में एक स्पेशल चाबी का गुच्छा घूम रहा था । जिसमें छोटे साइज के । मगर शक्तिशाली चाकू । टार्च । और लाइटर जैसे कुछ आयटम फ़ंसे हुये थे ।
चलते चलते ही मैंने एक बबूल की कलम जितनी पतली टहनी तोडी । और उसे कलम की ही तरह छीलने लगा ।
वर्मा जी । अचानक मैं बोला । आपकी जिस पुत्रवधू पर प्रेत की छाया है । उसके पति का नाम क्या है ?
रामवीर वर्मा । साहिब सिंह ने असमंजस की हालत में उत्तर दिया । वह बिजली विभाग में है ।
लेकिन प्रसून जी । भगवान के लिये मुझे कुछ तो बताईये । मैं बेहद सस्पेंस महसूस कर रहा हूं ?
वर्मा जी जो जानना चाह रहे थे । वह साधना के नियमों के विरुद्ध था । और अदृश्य जगत के किसी भी रहस्य को सम्बन्धित आदमी को बताना तो एकदम गलत था ।
 इसलिये मैंने वर्मा जी से झूठ बोला । और कहा । अभी मैं खुद जानने की कोशिश कर रहा हूं । तो आपको क्या बताऊं ? इस उत्तर पर वर्मा जी असहाय से हो गये । और बैचेनी से पहलू बदलने लगे ।
लेकिन हकीकत कुछ और ही थी ।
डब्बू नाम के reborn यानी पुनर्जन्म लेने वाले बच्चे का माइंड रीड करके मैं बहुत कुछ जान चुका था । हालांकि इस reborn child को अभी तक न तो अपने पिछले जन्म की याद थी । और न ही उसने ऐसी कोई बात अभी तक कही थी । जैसा कि reborn बच्चे अक्सर कहते हैं ।
पर यह एक संयोग ही था । कि वह अपने बाबा के साथ मानसी विला आया । और मैंने उसमें प्रेतत्व भाव महसूस किया । और स्वाभाविक ही मैंने उसका दिमाग रीड किया ।
और उसी के परिणामस्वरूप मैं पहले फ़ार्म हाउस और अब नदी के किनारे खडा था । यानी वह स्थान जहां से इस घटना की शुरूआत हुयी । यानी वह स्थान जहां से नन्दू उर्फ़ नन्दलाल गौतम एक जीवन की यात्रा अधूरी छोडकर । किसी बदले की खातिर । साहिब सिंह वर्मा के घर उनका नाती बन के आया ।
नन्दू उर्फ़ reborn डब्बू के दिमाग में दो घटनायें प्रमुखता से फ़ीड थी । एक तो उसका नदी में डूबकर मर जाना । और दूसरा उसकी बहन लक्ष्मी उर्फ़ लच्छो से कुछ लोगों द्वारा बलात्कार । लेकिन ये घटनायें पूरी स्पष्टता से नही थी । और मैं डब्बू की छोटी उम्र को देखते हुये किसी तरह का प्रयोग उस पर नहीं कर सकता था ।
इसका सीधा सा मतलब यह था कि ये जानकारी मैं रामवीर से ही हासिल करता । जो इस घटना में शामिल था । और तब आगे कोई निर्णय लेता ।
ये जमीन । मैं खेतों की तरफ़ इशारा करके बोला । आपने हाल फ़िलहाल यानी लगभग तीन साल पहले ही खरीदी है । जो कि विवादित होने के कारण कोई ले नहीं पा रहा था । और आपने दबंग होने के कारण ले ली है । जबकि आपको सरकारी कानून की वजह से इसकी डबल रजिस्ट्री करानी पडी ।
ओह माय गाड । साहिब सिंह के मुंह से स्वतः ही निकल गया । मैं तय नहीं कर पा रहा । आप को क्या समझूं ? और आपसे क्या व्यवहार करूं ?
आप जमीन के बारे में कुछ बताईये ?
ये जमीन । वर्मा जी अजीव भाव से बोले । राजाराम गौतम की थी । राजाराम आज से नौ साल पहले स्वर्गवासी हो गया था । उसके बाद उसके परिवार में उसकी पत्नी धन देवी । बडा लडका नन्दू । जवान लडकी लक्ष्मी । और ग्यारह साल का छोटा लडका मुकेश रह गये थे ।
मुझे इस घटना की सच्चाई तो ठीक से मालूम नहीं है । क्योंकि उस वक्त मैं गांव से बाहर था । लेकिन ऐसा कहा जाता है । कि गांव के कुछ लोगों ने बाहर के लोगों के साथ लक्ष्मी से बलात्कार किया । इस घटना को लेकर नन्दू बदला लेने की ताक में रहने लगा ।
लेकिन वह बेचारा बदला ले पाता । इससे पहले ही नदी में नहाते हुये डूबकर मर गया । क्योंकि धन देवी के लिये गांव का माहौल खराब हो चुका था । और उस पर उसका बडा लडका असमय ही मर गया । इसलिये धन देवी ये गांव छोडकर अपने दोनों बच्चों के साथ अपने भाई के गांव चली गयी ।
वह इस जमीन को बेचना चाहती थी । लेकिन कई दबंगो की इस पर नजर होने के कारण कोई ले नहीं पा रहा था । तब धन देवी के भाई ने मुझसे सम्पर्क किया । और ये दस बीघा जमीन और वो महुआ आम का बगीचा मैंने उससे खरीद लिया ।
राजाराम और उसका परिवार बहुत ही भले थे । उनके गांव से हमेशा के लिये चले जाने के कारण मुझे बहुत अफ़सोस हुआ ।...लेकिन प्रसून जी । आप यह सब कुछ क्यों पूछ रहे हैं । इसका रेशमा की परेशानी से क्या मतलब है । जिसके लिये मैं खासतौर पर आपको लाया हूं ?
मैंने एक निगाह डब्बू पर डाली । और बोला । चलिये । आपके घर चलते हैं ?

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