शनिवार, फ़रवरी 08, 2014

काली विधवा

उसकी पूरी बात सुनने के बाद । मैंने एक बार फ़िर उस औरत को गौर से देखा । उसका नाम हेमलता सक्सेना था । लगभग चालीस साल को पार कर रही हेमलता कसे बदन की मालकिन थी । और अपनी आयु को झुठलाती हुयी तीस साल की युवती मालूम होती थी । इतनी उमर की हो जाने के बाद भी हेमलता चंचल स्वभाव की थी । मगर इस वक्त अपनी परेशानी को लेकर अस्थिर और अशान्त हो गयी थी । यही स्थिति मेरे लिये फ़ायदेमन्द थी । और इसी का लाभ उठाते हुये मैं उसका दिमाग रीड कर चुका था । हेमलता के अनुसार वह अच्छे घर से थी । उसके पति का मार्केट में अच्छा शोरूम था । घर की आर्थिक स्थित काफ़ी अच्छी थी । इसका प्रमाण ये था कि पांच सदस्यों के उसके परिवार में तीन महंगी गाङियां थी । उसके दोनों बेटों की शादी हो चुकी थी । और बेटी पलक अभी कुंआरी थी । उसकी परेशानी की वजह लगभग चार महीनों से उसके पति का बदला बदला हुआ व्यवहार था । उसका पति अब बिजनेस में कोई रुचि नहीं लेता था । और काफ़ी दिनों से टाइम बे टाइम उस पुराने किले में पहुँच जाता था । जो उसके घर से आधा किमी की दूरी पर था । उसने बेहद सकुचाते हुये बताया कि उसे ऐसा महसूस होता था कि उसका पति स्वयं अपनी ही बेटी को बुरी नजर से देखता था । और ऐसा लगता था । मानों वो उसका पति न होकर कोई अन्य ही हो ।
- ब्लेक विडो । मेरे मुँह से निकला - काली विधवा ।
- क्या ?  हेमलता उछलकर बोली - कौन काली विधवा ?
ब्लेक विडो दरअसल अमेरिका आदि कुछ पश्चिमी देशों में पायी जाने वाली एक खतरनाक काली मकङी होती है । जिसे वहाँ के लोग black widow कहते हैं । इसको ब्लेक विडो कहने का कारण ये है कि ये नर मकङे से सहवास करने के बाद उसको मार देती है । और उसका सारा रस चूस लेती है । दूसरे ये मकङी अक्सर जूते चप्प्लों में बैठ जाती है । और जैसे ही कोई आदमी या औरत उसमें पाँव डालता है । ये पता नहीं काटती है । या क्या करती है कि उस इंसान को उस समय तो कुछ पता नहीं चलता । पर बाद में उसे तेज दर्द होता है । और वह खङे होने के काबिल भी नहीं रह जाता । यहाँ तक कहा जाता है कि इसके शिकार इंसान का समय पर । और समुचित इलाज न हो । तो आदमी को लकवा मार जाता है । कुल मिलाकर विश्व के कई देशों में जहाँ यह मकङी पायी जाती है । वहाँ के लोग इससे आतंकवादी की तरह डरते हैं । लेकिन हेमलता के मामले में इस ब्लेक विडो का कोई लेना देना नहीं था । दरअसल अब तक की अदृश्य प्रेत कनेक्टिविटी से मैं जितना जान सका था । हेमलता का मामला कज्जलिका ( प्रेत की एक किस्म ) नामक एक छोटी मोटी प्रेतनी का मामला था । जिसका मैंने और नीलेश ने मजाक में ब्लेक विडो नाम रखा था । कज्जलिका प्रेत योनि में प्राय वे लङकियां जाती है । जो सुसाइड के द्वारा अपनी मौत का रास्ता खुद चुनती हैं । फ़िर उस मौत की वजह चाहे प्रेमी के साथ शादी न हो पाना । कुंआरेपन में गर्भ ठहर जाना । पङाई या कैरियर । या फ़िर हजारों वजहों में से कोई भी वजह क्यों न हो । यदि कोई लङकी या विवाहित युवती सुसाइड करती है । तो वो कज्जलिका प्रेतनी बन जाती है ।
यहाँ मैं ईश्वर का एक विचित्र नियम बताना चाहूँगा । मान लो । इसी अवस्था की कोई युवती अकाल मौत मर जाती है । जैसे एक्सीडेंट या प्रसव । या कोई बीमारी । या कोई अन्य वजह से । कहने का मतलब वह खुद नहीं मरती । बल्कि किसी कारणवश मर जाती है । तो नाइंटी फ़ाइव परसेंट वह कभी भी प्रेत योनि को प्राप्त नहीं होती । इसके विपरीत सुसाइड करने वाली । हंड्रेड परसेंट प्रेत योनि को ही प्राप्त होती है ।
इस सिद्धांत के पीछे एक महत्वपूर्ण रूल काम करता है कि इस अनमोल शरीर को जो देवताओं को भी दुर्लभ है । उसने स्वयं और समय से पहले नष्ट कर दिया । अब उसके लिये वेकेंसी कहाँ से आये ? लिहाजा ऐसी ही स्थिति के लिये बने प्रेत लोकों के प्रेत उसे पकङ ले जाते हैं । और वहाँ उनके साथ खरीद कर लायी हुयी दासियों जैसा व्यवहार होता है । और कोई भी प्रेत उसके साथ हवस पूरी कर सकता है ।
खैर ! इसका विस्तार न करते हुये कज्जलिका का मनुष्यों पर क्या प्रभाव पङता है ? इसके बारे में बता रहा हूँ । वैसे तो ज्यादातर सभी प्रकार के प्रेत प्रेतनियाँ कामवासना में बेहद रुचि रखते हैं । पर क्योंकि कज्जलिका जैसी ना के बराबर शक्ति रखने वाली प्रेतनी प्रेतों की अधिक हवस का शिकार होती है । तो एक लम्बा समय बीतने के बाद वे उन्मादिनी हो उठती है । और जब प्रेतों की उनमें दिलचस्पी कम हो जाती है । तो ये प्रथ्वी आदि लोकों पर विचरण करती है । ये ज्यादातर पुरुषों को शिकार बनाती है । और इसके शिकार पुरुषों को सपने में । या कभी कभी एकान्त स्थलों पर एक बेहद काली औरत की प्रत्यक्ष छाया दिखायी देती है । जैसे ही पुरुष इस रहस्यमय छाया के बारे में सोचता है । उसमें प्रेत भाव प्रविष्ट होने लगता है । और क्योंकि जिस पर एक बार प्रेत भाव आवेश हो जाता है । तो ये बार बार उसको दिखायी देती है । और धीरे धीरे अपने शिकार को जकङ लेती है । शिकार को कुछ पता नहीं चलता । और ये धीरे धीरे उसको चूसती रहती है ।
पर बात केवल कज्जलिका तक ही सीमित होती । तो मैं हेमलता की परेशानी वहीं बैठे बैठे ही ठीक कर देता । और वो जान तक नहीं पाती ।
दरअसल ये आफ़त हेमलता की खुद की छोटी सी गलती से आयी थी । और वो अज्ञात रूप से हुये इस षडयंत्र को जान तक नही सकी थी ।
हुआ ये कि हेमलता की लङकी पलक को बगल आदि में निकलने बाले बङे बङे फ़ोङे " ककरबाई " की परेशानी हो गयी । और जब वह किसी के परामर्श से लङकी को गमा देवी के किसी मन्दिर में ले गयी । तो वहाँ उसकी भेंट " बगङा बाबा " नाम के साधु से हो गयी ।
बगङा बाबा को दुनिंया साधु के रूप में जानती थी । पर वास्तव में वह मध्यम स्तर का एक कमीना तान्त्रिक था । बगङा ने उसकी परेशानी के बारे में पूछा । और आश्चर्यजनक रूप से पलक के फ़ोङों में होने वाला दर्द गायब कर दिया । इससे बे दोनों माँ बेटी बगङा से बेहद प्रभावित हुयी । बगङा ने कुछ टोने टोटके गंडा तावीज जैसे उपक्रम जिनमें से कुछ आवश्यक भी थे । उन्हें दे दिये ।
लेकिन भलाई करते करते उसके दिमाग में पलक को " माध्यम " बनाने का विचार आ गया । और उसने उन भोली औरतों की ना जानकारी मैं उनसे उन्ही के द्वारा अपने उद्देश्य का तन्त्र चला दिया । तीन दिनों में पलक की परेशानी आश्चर्यजनक ढंग से गायब हो गयी । तो हेमलता के घरवालों के लिये बगङा भगवान हो गया । और पलक का बाप शोभाराम भी अक्सर बगङा बाबा के पास जाने लगा । ये बेचारा परिवार नहीं जानता था कि वे कितने बङे चक्रव्यूह में फ़ँसने जा रहे हैं ।
बगङा एक पुराने वीरान किले के तहखाने में रहता था । और ये कज्जलिका भी उसी किले में रहती थी ।
- ब्लेक विडो ।  मेरे मुँह से निकला ।
- क्या ?  हेमलता हङबङाई - ये बारबार आप ब्लेक विडो किसे कह रहे हैं..प्रसून जी ?
दरअसल ऊपर बताये हुये वाकये में हेमलता ने मुझे बेहद संक्षेप में ही बताया था । यह सब उसकी बेटी की परेशानी । बगङा से उसका मिलना..आदि सब मैंने उसके परेशान दिमाग से रीड किया था ।
जब ये पूरी बात मैंने उसे एक कहानी की तरह सुनाई । तो वह लगभग मेरे पैरों पर ही गिर पङी । पर साधना के नियमों के अनुसार मैंने उस पर क्या और कितना खतरा आदि है । ये सब नहीं बताया ।
मुझे मामला बेहद इंट्रेस्टिंग और टक्कर लेने जैसा आभासित होने लगा । मैंने नीलेश को तुरन्त फ़ोन करके बुलाया । नीलेश मेरा दोस्त था । और अलौकिक साधनाओं का साधक भी था । हांलाकि नीलेश को इस क्षेत्र में ज्यादा उपलब्धि हासिल नहीं हुयी थी । फ़िर भी वह टुच्चे बाबाओं के मुकाबले अच्छा साधक था । और अगर मामला इतना ही था । तो वो आराम से बगङा को बोरिया बिस्तर बांधनें पर मजबूर कर सकता था । फ़िर भी न जाने क्यों मुझे उसे अकेला भेजने की इच्छा न हुयी । मेरा दिल कह रहा था । बात इससे भी कुछ ज्यादा लग रही है । पर क्यों लग रही है । ये पता नहीं था । मेरा फ़ोन सुनकर नीलेश बोला - क्या बात है गुरुदेव ?
- ब्लेक विडो ।  मेरे मुँह से निकला ।
वास्तव में मैं नीलेश का गुरु नहीं था । हमारे गुरु एक अन्य बाबाजी थे । पर वह अपनी स्टायल में मुझे अक्सर गुरु बोलता था । दस मिनट बाद ही नीलेश बाइक पर मेरे सामने पहुँच गया ।
जितना संभव हो सके । उतना काम आन द स्पाट निपटाने की अपनी पुरानी आदत के चलते हुये मैंने एक सिगरेट सुलगायी । और हेमलता की काली काली आँखों में झाँकने लगा । उसके शरीर में एक जोर की झुरझुरी हुयी । और कुछ ही क्षणों में वह नशीली आँखो से मुझे देखने लगी । मैंने एक मानसिक आदेश उसको दिया । हेमलता ने यन्त्र की भाँति अपने स्तनों को निर्वस्त्र कर दिया । और मूर्ति की तरह निश्चल होकर बैठी रही । मैंने पूरे इतमीनान से सिगरेट का धुँआ उसके मुँह और वक्षों पर फ़ेंका । और बेहद सधे स्वर में कहा - कज्जलिका...।
मुझे बेहद हैरत हुयी । कज्जलिका जैसी मामूली प्रेतनी एक छोटे प्रेत आवाहन पर न तो कुछ सच उगलने को तैयार हुयी । और न ही मुझसे भयभीत हुयी । उल्टे वह माध्यम हेमलता के थ्रू मुझसे अश्लील बातें करने लगी । और सम्भोग के लिये उकसाने लगी । जबकि ब्लेक विडो को परखने के लिये मैंने उसी के स्तर का आक्रमण किया था ।
पर वह इस तरह हँस रही थी । मानों मेरा मजाक उङा रही हो । इसका एकदम सीधा और साफ़ मतलब था कि कज्जलिका को बाहरी तौर पर किसी बङी शक्ति का समर्थन प्राप्त था । क्या ये समर्थन सिर्फ़ बगङा का था । या किसी और प्रेत शक्ति का ?
मैंने पहले ही ये भांप लिया था कि ये मामला मेरे अनुमान से अधिक गम्भीर हो सकता है । और इसका मतलब ये हो सकता है कि हेमलता के घर के आसपास कोई बङी प्रेत शक्ति अपने किसी खास उद्देश्य या किसी खास आदेश पर डेरा जमाये बैठी हो ।
करीब आधा घन्टा बाद ! हेमलता ने बेहद थके अन्दाज में आँखे खोली । और हङबङा कर बोली - सारी ! लगता है..मुझे झप्पी आ गयी थी ।
नीलेश ने उसके कपङे पूर्ववत कर दिये थे । और पिछले आधा घन्टे में उसके साथ जो हुआ था । वह उसके दिमाग की गहराईयों में गहरे दफ़न हो चुका था । और एक कमाल द्वारा वह सिर्फ़ इतना ही महसूस कर सकती थी । मानों अचानक उसे नींद आ गयी हो । उसके साथ क्या हुआ था । कुछ भी तो नहीं ।
- ब्लेक विडो ।  मेरे मुँह से निकला । पर अबकी बार हेमलता कुछ नही बोली ।
ठीक एक घन्टे बाद ! मैं नीलेश और हेमलता किले के अन्दर खङे थे । शाम के साङे सात बजने बाले थे । और हल्का अंधेरा हो जाने से वह रहस्यमय किला और भी रहस्यमय प्रतीत हो रहा था । मैंने एक निरीक्षणात्मक निगाह किले में चारों तरफ़ घुमायी । और फ़िर मुस्कराकर किले के अन्दर खङे उस विशाल बरगद के पेङ को देखना लगा ।
- तक्षणा ।  मेरे मुँह से निकला - ये हुयी न कोई बात ।
- तक्षणा ।  नीलेश एकदम चौंककर बोला - तक्षणा ..और प्रथ्वी पर ..?
हेमलता भौंचक्का मुँह लिये अजीव भाव से हमें देख रही थी ।
तक्षणा एक खतरनाक किस्म की प्रेतनी होती है । प्रेत जगत में इसकी हैसियत महारानी के समान होती है । ये अक्सर बङी शक्ति वाले जिन्नों और वेतालों से भोग विलास करती हैं । इसके शिकार स्त्री पुरुषों के साथ " अचानक " शब्द निश्चय ही जुङा होता है । अचानक हार्ट अटेक हो गया । अचानक उल्टी हुयी । और मर गये । पता ही नही चला । कल तो अच्छे खासे थे । अचानक मर गये । इसके शिकार सामान्य अवस्था में " अचानक " मरते हैं । उनका किसी प्रकार का कोई एक्सीडेंट..कोई रोग..कोई वजह नहीं होती ।
लेकिन यहाँ मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि एक दिन में इस तरह " अचानक " हुयी पचास हजार मौतों में से अधिकतम एक या दो मौत तक्षणा के कारण होती हैं । और वो भी विना वजह नहीं होती । बल्कि इंसान की जानबूझ कर या अज्ञानता में की गयी गलती की वजह से होती हैं ।
जब मैंने हेमलता को विना कोई विवरण बताये । इस तरह की " अचानक " मौतें जो उसके क्षेत्र में हुयी हों । के बारे में पूछा । तो उसने पिछले तीन महीने में इक्कीस मौतों की जानकारी दी । और तब उसने आश्चर्य से मेरी तरफ़ देखा ।
अब मामला शीशे की तरह साफ़ था । कज्जलिका तक्षणा का मोहरा बनी हुयी थी । और मूर्ख तान्त्रिक बगङा बाबा ये सोचकर खुश था कि तक्षणा जैसी प्रेतनी उसकी तान्त्रिक शक्ति को बङाने में सहयोग कर रही है ।
ये एक किस्म का महाजाल था । जिसमें बगङा और सक्सेना परिवार मोहरे के रूप में बलि का बकरा बने हुये थे । और कज्जलिका तो पहले ही प्रेतनी थी । उसका क्या बिगङना था ?
- ब्लेक विडो ।  मेरे मुँह से निकला ।
अब हेमलता को इस मायावी चक्कर के बारे में उतना बताना आवश्यक था । जितने में उसको या उसके परिवार को अपनी भूमिका निभानी थी । मैंने एक सिगरेट सुलगायी । और बेशर्मी से धुँआ हेमलता के चेहरे पर फ़ेंका ..?
किसी भी किस्म की प्रेत पीङा से मुक्ति हेतु " माध्यम " की बहुत बङी भूमिका होती है । ये माध्यम वही स्त्री पुरुष भी हो सकते हैं । जो प्रेत के शिकंजे में हों । या फ़िर कोई दूसरा भी इनके स्थान पर बलि का बकरा बन सकता है ।
छोटे मोटे सटीक प्रेत आवाहन के लिये " माध्यम " को कमर तक निर्वस्त्र करके । उसके अनावृत शरीर पर । एक नली के माध्यम से । कुछ विशेष घटकों जैसे धूप लोबान निर्कंटिका जैसी चीजों का सुगन्धित धुँआ फ़ेंका जाता है ।
यह मात्र कबूलवाने के उद्देश्य से होता है । लेकिन जब प्रेत का प्रभाव बिलकुल खत्म करना हो । तो माध्यम को पूर्ण निर्वस्त्र करके धुँआ फ़ेंका जाता है । और बाद में उसके किसी अंग को हल्का सा दाग दिया जाता है । तक्षणा को लेकर दूसरी समस्या ये होती है कि आवाहन के समय माध्यम अर्ध बेहोशी की हालत में होता है । यानी जब तक्षणा पूरे वेग पर होती है । तो माध्यम को अपने बारे में कुछ पता नहीं होता कि ये सब मेरे साथ घटित हो रहा है । लेकिन बीच बीच में तक्षणा उसके शरीर को छोङकर बार बार प्रेत आवेश करती है । उस समय माध्यम को अपने अस्तित्व का बोध होने लगता है ।
अब समस्या ये थी कि तक्षणा कोई छोटी मोटी चुङैल तो होती नहीं । वो अपना शिकार छोङने में दस घन्टे का समय भी ले सकती थी । और उसका माध्यम बीच बीच में आधा या एक घन्टे के लिये भी होश में आ सकता है । तक्षणा शिकार को मुक्त करने से पहले सम्भोग की भी मांग कर सकती है । दरअसल प्रेत आवाहन के समय क्या स्थिति बनेगी । इसके बारे में पहले से नहीं बताया जा सकता ।
अब तक्षणा सक्सेना परिवार के साथ क्या करने बाली थी ?
तक्षणा के शिकार दो थे । हेमलता का पति शोभाराम । और उसकी बेटी पलक । शोभाराम को तो पहले ही कज्जलिका निरंतर चूसकर खोखला कर रही थी । पलक किसी दिन सम्मोहित अवस्था में किले तक आती । और तक्षणा उसे अपने आवेश में ले लेती ।
फ़िर वह अपनी मर्जी से बगङा या अपने पिता शोभाराम से ही सहवास करती । और बाद में आत्म ग्लानि का शिकार होकर उसी बरगद के पेङ से फ़ांसी लगाकर मर जाती । और कुछ दिनों बाद शोभाराम भी " अचानक " मर जाता । इस तरह दो नये प्रेत बन जाते । अब प्रेतों के प्रजनन से तो बच्चे होते नहीं हैं ?
- ब्लेक विडो ।  मेरे मुँह से निकला ।
ये पूरी बात ज्यों की त्यों न बताते हुये मैंने हेमलता के परिवार पर क्या खतरा है । और इसके लिये उसे क्या करना होगा । सिर्फ़ इतना बताया । सुनकर हेमलता के छक्के छूट गये । माध्यम सिर्फ़ दो ही लोग हो सकते थे । या पलक । या फ़िर स्वयं हेमलता ।
अब हेमलता पलक को माध्यम बनाती । तो उसे ये कैसे अच्छा लगता कि उसकी बेटी नग्नावस्था में बैठी है । और उसके साथ सम्भोग भी हो सकता है । बेटी को इस क्रिया हेतु अकेला बैठाना भी उसे गवारा नहीं था ... आदि । ऐसी ही बातों पर अनेक पहलुओ से विचार करते हुये उसने स्वयं ही माध्यम बनने का फ़ैसला लिया । मगर बेहद डरते डरते ।
- ब्लेक विडो ।  नीलेश के मुँह से निकला - काली विधवा ।
रात के दस बजे प्रेत संधान आरम्भ हो गया । कुछ सोचकर मैंने जानबूझ कर इस कार्य हेतु किले के अन्दर का वही स्थान चुना था । जहाँ तक्षणा का बरगद के पेङ पर डेरा था । क्योंकि इस महाजाल से मुझे न सिर्फ़ बगङा को भी छुङाना था । बल्कि उसे आयन्दा के लिये सबक भी सिखाना था । ताकि आगे से वो तन्त्र शक्ति का दुरुपयोग न कर सके । और इसके लिये वो वीरान किला ही मेरी नजर में उपयुक्त था । जैसे ही प्रेत आवाहन के लिये प्रयुक्त सामग्री जली । और अजीव सुगन्ध वाला धुआं फ़ैला । माध्यम हेमलता निर्वस्त्र अवस्था में झूमने लगी । कभी वह उच्च स्वर में खिलखिलाती । कभी दयनीय अवस्था में रोती । कभी वह मुझे देख लेने की धमकी देती । कभी हाथ जोङकर गिङगिङाती । तभी मुझे जिस पल का इंतजार था । वो आ गया । वीरान किले के तहखाने से निकलकर बगङा बाबा हमारे सामने आ गया । और जलती आँखो से मुझे घूरने लगा । उसे आश्चर्य इस बात का हो रहा था कि चाकलेटी फ़िल्मी हीरो के समान नजर आने वाले ये दो युवक आखिर हैं कौन ? और क्या कर रहे हैं ? उसने अपनी तन्त्र क्रिया द्वारा जानना चाहा । पर मैं और नीलेश अभेदी कवच ( कम से कम उस स्तर के तान्त्रिक के लिये ) में थे । लिहाजा बगङा को हम दोनों साधारण ढोंगी नजर आये । वह बेहद भद्दी भद्दी गालिंया देता हुआ हमारी तरफ़ बङने लगा । मगर नीलेश के दो शक्तिशाली मुक्कों ने उसका जबङा तोङ दिया । और वह मुँह से खून गिराता हुआ जमीन पर गिरकर तङपने लगा । जाहिर था कि उसकी तमाम शक्ति भी हमारे लिये कोई वैल्यू नहीं रखती थी ।
प्रेत आवाहन के चार घन्टों बाद । तमाम हील हुज्जत के साथ ।
तक्षणा ने हम दोनों नौजवानों को कामवासना की लालच भरी नजरों से घूरते हुये दो शर्तें रखी । पहली - मुझे और नीलेश को उसे भरपूर सम्भोग सुख देना होगा । और दूसरे किसी बकरे आदि पशु की बलि देकर उसके गर्म रक्त से उसे नहलाना होगा ।
मैंने उसे जबाब दिया  कि मैं और नीलेश कुँआरे है । अतः सम्भोग क्या होता है ? क्यों होता है ? कैसे होता है ? हमें नहीं मालूम था ।
रही पशु हत्या कर बलि देने की बात । तो हम प्योर वेजेटेरियन हैं । अंडा तक नहीं फ़ोङ सकते । तो फ़िर बकरे या भेंसे का मुन्डा भला कैसे काट पायेंगे ...आदि आदि । न चाहते हुये भी नीलेश की हँसी निकल गयी ।
रात के चार बजे ! तक्षणा और कज्जलिका की विदाई हो चुकी थी ।
बगङा बाबा बरगद के नीचे बैठा अपना मुँह पकङकर कराह रहा था । हेमलता अब भी अचेत पङी थी । नीलेश ने दो बाल्टी ठंडा पानी उसके नंगे बदन पर उङेल दिया था । हम दोनों ने एक एक सिगरेट सुलगायी । और रहस्मय डरावने किले में आराम से टहलते हुये हेमलता के होश में आने का इंतजार करने लगे । समाप्त

कोई टिप्पणी नहीं:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...